एक दुकान को 70- 80 लाख रूपये में बेंचा
उसने बैनाम में 10 लाख रूपये का चेक देना दिखाया, लेकिन वसीला ने अपने खाते में रुपये नहीं लिए क्योंकि दुकान का रेट बहुत सस्ता लिखा गया था। वसीला ने अपना बैंक खाता भी होल्ड करवा लिया ताकि अधिवक्ता रिंकू त्रिपाठी किसी माध्यम से उसके खाते में रुपये न भेज सके। वसीला ने दीवानी न्यायालय श्रावस्ती बैनामा कैंसिलेशन का वाद दायर कर दिया, जो न्यायालय में जारी है।
यही नहीं वसीला ने दुकान का गलत बैनामा करवाने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए तहरीर भी दी। अधिवक्ता रिंकू त्रिपाठी ने इस बीच फर्जी तरीके से कम दाम में बैनामा की हुई दुकान मे से एक दुकान को 70- 80 लाख रूपये में बेंच दिया। खुद को मुकदमें में फंसता देख अधिवक्ता रिंकू त्रिपाठी रोशन खां के पहली पत्नी के बेटों नसीब व हसीब और वसीला के पहले पति के बड़े बेटे मुजीब को प्रलोभन देकर अपने साथ मिला लिया और रोशन खां व वसीला के हत्या की साजिश रच डाली।
बांस के डंडे से दबा दिया गला
एसपी ने बताया कि कड़ाई से पूछताछ के दौरान नसीब, मुसीब व हसीब ने बताया कि वो लोग अधिवक्ता प्रभाकर त्रिपाठी उर्फ रिंकू त्रिपाठी के बहकावे में आकर पिता को बिना बताये संपत्ति को कम दाम में बेंचने, फर्जी बैनामा होने व जांच के दौरान मुकदमे में फंसने से डरे हुए थे।
इसी के चलते तीनों ने सोते समय बांस के डंडे से अपने पिता मोहम्मद रोशन खां व मां वसीला की गला दबाकर हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त बांस का डंडा भी बरामद कर लिया है। खुलासे में उपनिरीक्षक रामसजीवन निषाद, रामदुलार यादव, संतोष यादव, हेड कांस्टेबल अभिनाश यादव, राम सिंह आदि शामिल रहे।