कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मंगलवार को बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। श्रीलंका से आए दल ने श्रीलंका मंदिर में विशेष पूजा की। इसके बाद दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर वहां मौजूद स्तूपों के महत्व के बारे में जानकारी ली।पूजा के दौरान बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने कहा कि सिद्धार्थ बचपन से ही अत्यंत करुण हृदय वाले थे। एक बार वे अपने राज्य कपिलवस्तु की गलियों में धूम रहे थे। इस दौरान उनकी दृष्टि चार दृश्यों पर पड़ी। देखा कि एक वृद्ध विकलांग है, एक रोगी, एक पार्थिव शरीर और एक साधु। इन चार दृश्यों को देखकर सिद्धार्थ समझ गए थे कि सब का जन्म होता है, सब को बुढ़ापा आता है, सब को बीमारी होती है और एक दिन सब मृत्यु को प्राप्त होते हैं।
इससे व्यथित होकर उन्होंने अपना घर-द्वार, पत्नी, पुत्र व राजपाठ का त्याग करते हुए साधु का जीवन अपना लिया। वे जन्म, बुढ़ापा, दर्द, बीमारी और मृत्यु से जुड़े सवालों की खोज में निकल पड़े। संवाद