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दुधवा व कतर्निया की तर्ज पर श्रावस्ती में भी होगा जंगल सफारी

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श्रावस्ती। श्रावस्ती के जंगल को दुधवा व कतर्निया की तर्ज पर जंगल सफारी के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां केन नाले में नौकायन, पांच किलोमीटर इको फ्रेंडली सर्किल, बच्चों के लिए पार्क व टेंट में रात गुजारने का रोमांच पर्यटकों के आकर्षण का विशेष केंद्र बनेगा। इसके साथ ही ट्री-हट, थारू-हट भी नए स्वरूप में विकसित होगा। इसे अमल में लाने की कार्य योजना तैयार कर इसे बौद्ध पर्यटन जोन से भी जोड़ने की योजना है।
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श्रावस्ती क्षेत्र के अधिकांश इलाके में प्राकृतिक जंगल व नदियों का जाल है। इसमें राप्ती नदी, बूढ़ी राप्ती व केन नाला विशेषतौर पर शामिल हैं। अभी तक यह जंगल केवल प्राकृतिक संपदाओं को संजोए रखने का काम ही करता है। अब इसके ईको टूरिज्म स्वरूप को भी विकसित करने की कवायद शुरू हुई है। इसके लिए एक विशेष कार्य योजना को भी तैयार किया जा रहा है। इसके तहत इस जंगल क्षेत्र को दुधवा व कतर्निया की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही जो कमियां इन दोनों जंगल सफारी में रह गई थी, उसे भी यहां पर दूर करने का पूरा प्रयास रहेगा। प्रस्तावित कार्य योजना को अगले दस दिनों में तैयार कर प्रस्तुत किया जाएगा ताकि अगले माह सितंबर के अंत तक इसे अनुमोदित करा कर जमीन पर उतारने का कार्य शुरू कराया जा सके।
भिनगा जंगल के बीचोबीच से बहने वाले केन नाला में नौकायन सभी के आकर्षण का विशेष केंद्र बनेगा। इस नाले के दोनों ओर कु़छ विशेष प्रजाति के पेड़ लगे होने के कारण दोनों तट पर पौधों का ऐसा झुरमुट है जो पर्यटकों को प्राकृतिक संपदा की ओर स्वत: ही आकर्षित करेगा। केन नाला में पांच किलोमीटर तक सिल्ट सफाई करके उसे नौकायन के लिए विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही इसके तट पर टेंट लगा कर रात्रि गुजारने का मौका भी मिलेगा।
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प्रस्तावित कार्य योजना में जंगल के बीच में पांच किलोमीटर की गोलाई में चौड़े ट्रैक विकसित कर ईको ग्रीन सर्किल भी विकसित किया जाएगा। यह ट्रैक लोगों के टहलने या फिर साइकिल चलाने में भी उपयोग में लाया जा सकेगा। इसके बीचों बीच में विकसित होने वाले पार्क में औषधि पौधों की एक विशेष नर्सरी भी विकसित होगी। साथ ही यहां पर्यटकों के रात्रि विश्राम के लिए विशेष टेंट कार्टेज बनाने के साथ ही कैंटीन समेत अन्य मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया करायी जाएगी। पर्यटकों को लुभाने के लिए थारू व ट्री हट को भी विशेष तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि पर्यटकों को ज्यादा अच्छा लगे।
भगवान बुद्ध से साल के वृक्षों का विशेष जुड़ाव रहा है। इस दौरान उनके समय में कौशल में शाल भंजिका महोत्सव भी मनाया जाता था। एक माह तक चलने वाले इस महोत्सव में युवतियां साल के वृक्ष के नीचे आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थी। इसका प्रचलन मौर्य काल में भी देखने को मिला। श्रावस्ती के जंगल में साल के वृक्ष काफी संख्या में हैं। इससे पुराने समय में होने वाले साल भंजिका महोत्सव को भी फिर से शुरू किए जाने की तैयारी भी है।
श्रावस्ती को जंगल सफारी बनाने की कार्य योजना तैयार हो रही है। दस दिनों के अंदर पूरा डीपीआर बन कर तैयार हो जाएगा। इस बात का पूरा प्रयास होगा कि डीपीआर की संस्तुति के बाद अगले चार माह में इसे जमीनी तौर पर पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराया जा सके।
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एपी यादव, डीएफओ
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