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घड़े से बाहर निकलने को माननी पड़ी कुम्हार की बात

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कटरा (श्रावस्ती)। श्रीराम जानकी मंदिर कटरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के चौथे दिन वृंदावन से आए कलाकारों द्वारा श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का सजीव मंचन किया गया। इसे देखकर मौजूद भक्तजन भाव विभोर हो उठे। कार्यक्रम के दौरान आयोजित कथा पाठ में पंडित सुरेंद्र नाथ पांडे ने बताया कि एक बार मैया यशोदा कृष्ण के उलाहनों से तंग आकर छड़ी लेकर श्रीकृष्ण को मारने दौड़ी।
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मैया यशोदा को क्रोध में देखकर कृष्ण बचाव के लिए भागने लगे। भागते भागते वह एक कुम्हार के पास पहुंचे। कुम्हार तो अपने मिट्टी के घड़े बनाने में व्यस्त था। कृष्ण को देखकर वह बहुत प्रसन्न हुआ। कुम्हार जानता था कि श्री कृष्ण साक्षात परमेश्वर हैं। तब प्रभु ने कुम्हार से कहा कि कुम्हार जी, आज मेरी मैया मुझ पर बहुत क्रोधित है। मैया छड़ी लेकर मेरे पीछे आ रही है। भैया, मुझे कहीं छुपा लो। कुम्हार ने कृष्ण को एक बडे से मटके के नीचे छिपा दिया। कुछ ही क्षणों में मैया यशोदा भी वहां आ गईं और कुम्हार से पूछने लगी क्यूं रे, कुम्हार, तूने मेरे कन्हैया को कहीं देखा है क्या, कुम्हार ने कह दिया नहीं।
मैया के जाने के बाद प्रभु कृष्ण ने कुम्हार से खुद को घड़े से बाहर निकालने के लिए कहा। इस पर कुम्हार बोला ऐसे नहीं प्रभु पहले मुझे चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्त करने का वचन दो। भगवान मुस्कुराये और कहा ठीक है, मैं तुम्हें चौरासी लाख योनियों से मुक्त करने का वचन देता हूं। अब तो मुझे बाहर निकाल दो। कुम्हार कहने लगा मुझे अकेले नहीं, प्रभु मेरे परिवार के सभी लोगों को भी चौरासी लाख योनियों के बंधन से मुक्त करने का वचन दो। इसे मानने के बाद ही कुम्हार ने उन्हें घड़े से बाहर निकाला।
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