जमुनहा (श्रावस्ती)। भारत के किसानों के हिस्से की खाद से नेपाल में फसलें लहलहा रही है। तस्करी से खाद प्रतिदिन सीमा पार भेजी जा रही है। इस तस्करी से जिले के लाइसेंसधारी खाद विक्रेता भी प्रतिबोरी 300 से 400 का मुनाफा कमा रहे हैं। औसतन जिले को आवंटित होने वाली खाद में से 30 फीसदी तो तस्करी से नेपाल भेज दी जाती है। इलाकाई किसान अपने हिस्से की खाद नेपाल जाती देख मायूस हैं।
धान की रोपाई के बाद खाद की मांग बढ़ी है, खास तौर से यूरिया की। लेकिन जिले के बाजारों से यूरिया गायब हो चुकी है। किसान यूरिया के लिए दुकानों का चक्कर लगा रहे हैं। वहीं जिले की बाजारों से नेपाल को खाद की तस्करी होने के मामले का खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले को सीमावर्ती क्षेत्र के किसानों ने अपने मोबाइल में कैद कर लिया।
कहीं साइकिल तो कहीं ट्रैक्टर ट्राली से खाद जमुनहा से नेपाल जा रही है। यह कोई एक दो स्थानों पर नहीं हो रहा, बल्कि पूरे सीमा क्षेत्र में प्रतिदिन इस तरह की तस्करी आम बात हो गई है। यह सब तब हो रहा है, जब पूरे सीमा क्षेत्र में एसएसबी तैनात है। ऐसे में भारतीय खाद से नेपाल की फसलें तो लहलहा रही है, लेकिन जिले की फसलें खाद के अभाव में मुरझाई जा रही हैं। एडीएम कमलेश चंद्र ने बताया कि जिले के कोटे की खाद का नेपाल में तस्करी होने का मामला गंभीर है। कृषि विभाग को कार्रवाई करने का आदेश पहले ही दिया गया था। विभाग ने कुछ अवैध संचालित खाद दुकानों पर कार्रवाई की है, अभी और कार्रवाई बाकी है।
जिले में खाद बिक्री के लिए लाइसेंस अनिवार्य है। लेकिन भारत नेपाल सीमा से 10 किलोमीटर के क्षेत्र में खाद के लाइसेंस पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद जमुनहा के सीमावर्ती इलाकों में खाद का न केवल भंडारण हो रहा है, बल्कि यहां से नेपाल के लिए खाद की तस्करी भी हो रही है। स्थानीय दुकानदार इस तस्करी के माध्यम से प्रतिदिन प्रति बोरी 300 से 400 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। भारत नेपाल सीमा की भौगोलिक स्थिति विपरीत है। राप्ती नदी की वजह से भारतीय क्षेत्र के किसानों का खेत राप्ती नदी के दूसरी ओर व नोमेंस लैंड के बीच में है। कुछ स्थान तो ऐसे हैं, जहां दोनों देशों के किसानों ने नोमेंस लैंड तक खेतों की जोताई कर रखी है। ऐसे में जब एसएसबी व अन्य सुरक्षा एजेंसियां खाद की तस्करी पर अंकुश लगाने का प्रयास करती है, तो खेत में खाद डालने के नाम पर तस्कर उन्हें चकमा दे देते हैं।
नेपाल में खाद की तस्करी के लिए ज्यादा तौर पर साइकिल का इस्तेमाल किया जाता है। एक साइकिल पर चार से पांच बोरी खाद लादकर नेपाल पहुंचाई जाती है। इसके लिए पगडंडियों का इस्तेमाल होता है, जबकि जंगली रास्तों से ट्रैक्टर ट्राली से खाद की तस्करी हो रही है।