कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली, श्रावस्ती में चल रहा अंतरराष्ट्रीय धर्म परिषद सम्मेलन रविवार शाम संपन्न हुआ। इस दौरान विभिन्न प्रदेशों से आए बौद्ध भिक्षुओं व मनीषियों ने सुखमय जीवन जीने के लिए अतीत व भविष्य को छोड़कर वर्तमान में जीने की सलाह दी।
सम्मेलन में भिक्षु देवेंद्र थेरो ने कहा कि मनुष्य को चाहिए किअपने मन एवं मस्तिष्क पर किसी बात का बोझ ना डालें। सदैव खुशी व्यक्त करनी चाहिए। मस्तिष्क को वैभव आदि सीमाओं में न बांधकर अल्पकालिक खुशी से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। यदि मनुष्य सही मायने में अस्थायी खुशी को आज के तमोगुणी वातावरण में प्राप्त करना चाहता है तो उसका एकमात्र उपाय स्वयं के भीतर उस खुशी को तलाश कर जागृति पैदा करना होगा।
यह याद रखें कि खुशी हमारी स्वयं की रचना है आप धीरे-धीरे परिवर्तन करने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि व्यक्ति को सदैव हर परिस्थिति में संतुष्ट रहने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए उसे अतीत एवं भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान में जीना होगा। नकारात्मक संकल्पों को मन में प्रवेश न करने दें। अपना नजरिया सदैव सकारात्मक रखें। किसी भी असफलता पर निराश न हों बल्कि सफलता प्राप्त करने के लिए दोगुना प्रयास करें।
मन को हर्षित अवस्था में लाने के लिए ईश्वरीय ज्ञान और योग एक मुख्य साधन है। पवित्रता की शक्ति से ही विश्व परिवर्तन होगा। विश्व परिवर्तन राजयोग अपनाने से नहीं बल्कि जीवन में शांति ऊर्जा को बचाने से मिलेगी। इस दौरान मौजूद लोगों ने बालिकाओं को शिक्षित करने व मातृशक्ति को सम्मान देने का संकल्प लिया। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु शंकर, आनंद सागर, अशोक बौद्ध, निर्मल सागर, धम्म सागर, नाग लोक, मेघाथेरो आदि मौजूद रहे।