श्रावस्ती। तराई की मिट्टी में भी रसीली मलिहाबादी दशहरी की पौध तैयार हो रही है। यह पौध जुलाई माह में पंचायतों में बेची जाएगी। इसके लिए जमुनहा के बरगदहा में मनरेगा योजना के माध्यम से 50 हजार पौधों की पहली फलदार नर्सरी तैयार की जा रही है। इस नर्सरी पर करीब बीस लाख रुपया का खर्च आएगा। इसका संचालन समूह के माध्यम से होगा।
वृहद वृक्षारोपण अभियान जिले में जून व जुलाई माह में चलाया जाना है। इस अभियान के तहत लक्ष्य निर्धारित करके ग्राम पंचायतें व विभागों द्वारा वृक्षारोपण किया जाता है। अभी तक वृक्षारोपण के लिए आपूर्ति किए जाने वाले पौधों में अधिकांशता वन विभाग की आपूर्ति करता था। इसमें खैर सागौन सहित अन्य जंगली प्रजातियां होती थी। जिनका उपयोग वर्षों इंतजार के बाद इमारती लकड़ी में ही हो पाता था। पौध रोपण के लिए फलदार पौधों की आपूर्ति उद्यान विभाग बहुत ही सीमित मात्रा में करता था। पहली बार तराई इलाके में भी रसीली लजीज मलिहाबादी दशहरी आम की महक व स्वाद गांव पंचायतों में देखने को मिलेगा।
मनरेगा योजना के तहत जमुनहा के बरगदहा गांव में तैयार नर्सरी में चालीस हजार पौध मलिहाबाद से लाकर लगाए गए हैं, जबकि दस हजार पौध स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए हैं। इसमें अन्य फलदार पौध भी शामिल हैं। इन मलिहाबादी आम के पौधों से भविष्य में कटिंग आदि कार्य करके एक वृहद नर्सरी तैयार करने की योजना है। पहले चरण में तीस हजार पौध जो यहां तैयार हो रहे हैं, उन्हें सीधे तौर पर पंचायतों को बेचा जाएगा। मनरेगा योजना के तहत नर्सरी निर्माण के लिए 20 लाख रुपये का स्टीमेट बनाया गया था लेकिन पूरा कार्य 13 से 14 लाख में हो गया।
जिले में फलदार वृक्षों की कमी है। खास तौर से उन्नत किस्म के फलदार वृक्ष नहीं है। इसी लिए मनरेगा योजना के तहत इस बार यह नर्सरी तैयार कराई गई है। इससे भविष्य में उन्नत किस्म के फलदार पौध तैयार हो सकेंगे।
ईशान प्रताप सिंह, सीडीओ