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कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा प्रारंभ

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श्रावस्ती। भिनगा नगर के दीप वाटिका में बृहस्पतिवार से श्रीमद् भागवतकथा का शुभारंभ हुआ। जिसमें स्वामी आत्मानंद सरस्वती जी महराज द्वारा कथा का गुणगान किया जा रहा है। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को भिनगा नगर के मोर मंदिर से जलकलश यात्रा निकाली गई। जो नगर भ्रमण करते हुए कार्यक्रम स्थल पहुंची।
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भिनगा के दीप वाटिका में श्रीमद् भागवतकथा का आयोजन किया जा रहा है। जिसके पहले दिन बृहस्पतिवार को भिनगा नगर के मोर मंदिर से जलकलश यात्रा निकाली गई। यह यात्रा भिनगा नगर के अस्पताल तिराहा, नई बाजार, ईदगाह तिराहा, दहना होते हुए कार्यक्रम स्थल पहुंची। जहां कलश की विधि विधान पूर्वक स्थापना कराई गई। इस दौरान कथा व्यास ने बताया कि प्रत्येक व्यक्ति को भागवत कथा रूपी रस का पान अवश्य करना चाहिए। जिससे इस जीव का कल्याण होता है। इस भागवत रूपी अमृत का पान करने के लिए देवता भी तरसते हैं। इसमें भक्ति ज्ञान और वैराग्य कूट-कूट कर भरा है। जिस जीव के हृदय में भक्ति ज्ञान और वैराग्य आ जाते हैं। उसे परम शांति की प्राप्ति हो जाती है।
इस कथा को सुनने से ही मन वाणी पवित्र होकर विवेक की प्राप्ति हो जाती है। विवेक होने पर मुंह अशोक और शक्ति रूपी अज्ञान का नाश होकर ज्ञान की प्राप्ति हो जाती है। ज्ञान होने पर ही जीव को मुक्ति की प्राप्ति होती है। भगवान के 24 अवतारों की महिमा श्रीमद्भागवत में कही गई है। जिस स्थान पर यह कथा होती है, वह स्थान भी तीर्थ बन जाता है। भागवत वेद रूपी वृक्ष का एक ऐसा पका हुआ फल है, जिसमें न तो गुठली है और न ही छिलका है। इसमें तो रस ही रस है। इस मौके पर भारत गुप्ता, वेद गुप्ता व रामरूप गुप्ता सहित काफी संख्या में महिलाएं व युवतियां मौजूद रहीं।
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