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आत्मरक्षा का संदेश दे रहीं श्रावस्ती की बेटियां

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श्रावस्ती में इंटर कॉलेज में अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित कार्यक्रम में मौजूद अतिथि - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। दुनिया को शांति का संदेश देने वाली श्रावस्ती की बेटियां अब विश्व को बेटियों के आत्मसम्मान, सुरक्षा व संरक्षा का संदेश दे रही हैं। अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के कार्यक्रम संवाद से जुड़कर बेटियां जहां आत्मनिर्भर बन रही हैं, वहीं दूसरों को भी स्वावलंबी बनाने की मुहिम का हिस्सा भी बन रही हैं।
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बेटियों के लिए उच्च शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, स्वावलंबन व आत्मरक्षा के तरीकों की जानकारी बेहद जरूरी है ताकि वे समाज में व्याप्त कुरीतियों का डट कर मुकाबला कर सकें। जिस दिन बेटियां शिक्षित, स्वस्थ व आत्मरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार होंगी, उस दिन न तो किसी माता-पिता को बेटियों को लेकर कोई चिंता रहेगी और न ही कोई बेटियों के आत्मसम्मान को ठेस ही पहुंचा सकेगा।
अमर उजाला की ओर से शुरू की गई इस मुहिम को मेरा साधुवाद। वह दिन दूर नहीं जब अमर उजाला की यह मुहिम कामयाब होगी और बेटियां स्वस्थ, शिक्षित व स्वावलंबी बन अपने कुटुंब, जिला व देश का नाम रोशन करेंगी। ये बातें चौधरी रामबिहारी बुद्ध इंटर कॉलेज कटरा में आयोजित अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत आयोजित संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद वर्मा मंदिर के मठाधीश यूओ वाथा ने कही।
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श्रावस्ती ने दुनिया को शांति का संदेश दिया था। अब इसी श्रावस्ती की बेटियां दुनिया को महिला सशक्तिकरण, बालिका सुरक्षा व बालिका शिक्षा की अलख जगा रही हैं। जिस देश में कन्याओं को देवी के रूप में पूजा जाता है, वहां कन्या भ्रूण-हत्या जैसा महापाप रोकने के लिए इन बेटियों के साथ आम जन को भी जुड़ना होगा।
-यूओ बाथा, मठाधीश, वर्मा मंदिर
अमर उजाला द्वारा छेड़ी गई यह मुहिम अब परिवर्तन ला रही है। अपराजिता एट -दि-रेट अमर उजाला डाट काम से जुड़कर सिर्फ महिलाएं व बेटियां ही नहीं, आम जन भी बालिका शिक्षा व सुरक्षा सहित महिला सशक्तिकरण के लिए आगे आ रहे हैं। हर किसी को इस मुहिम से जुड़ कर परिवर्तन का साक्षी बनना चाहिए।
-मुन्नालाल यादव, प्रधानाचार्य
महिला व पुरुष समाज के पूरक हैं। इनमें से एक का भी अनुपात घटा तो उसके भयानक परिणाम भुगतने होंगे। कन्या भ्रूण-हत्या पर पूरी तरह से रोक न लगी तो लिंग अनुपात और बिगड़ेगा। ऐसा ही रहा तो बेटों के लिए बहू खोजे नहीं मिलेगी। अभी समय है, सोच बदलें। कन्या भ्रूण-हत्या का बहिष्कार कर बेटी की सुरक्षा व शिक्षा पर जोर दें।
-कल्पना द्विवेदी, शिक्षका
बेटे व बेटियों में फर्क न करें। दोनों ही समान शिक्षा, प्यार व दुलार के हकदार हैं। ऐसा कोई भी काम नहीं जो बेटे कर सकते हैं, बेटियां नहीं। ऐसे में इनमें भेद मिटाकर दोनों को उचित परवरिश, बेहतर शिक्षा व आत्मरक्षा के लिए तैयार करें ताकि बेटियों को आगे चल कर किसी के आश्रित न रहना पड़े।
-राजेश कुमार, शिक्षक
बाल विवाह, कन्या भ्रूण-हत्या अपराध है। ऐसा करने वाले सामाजिक रूप से तो महापाप कर ही रहे हैं, कानून की नजर में भी अपराध कर रहे हैं। बेटियों की सुरक्षा के लिए पुलिस 24 घंटे तत्पर है। यदि बेटियों का कोई अपमान करे तो बेझिझक टोल-फ्री नंबर पर सूचना दें। तत्काल सहायता मिलेगी।
-अरुण प्रताप राणा आरक्षी
बेटियों को शिक्षित करने में गुरुजन कोई कसर नहीं छोड़ते। माता-पिता को भी चाहिए कि वे बेटियों से घर का काम न लेकर उन्हें पढ़ने व खेलने-कूदने का मौका दें ताकि वे शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रह कर बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सकें। उन्हें सही व गलत की पहचान भी बताएं ताकि कोई उनका शोषण न कर सके।
-जोगेंद्र कुमार, शिक्षक
इनसेट:
संसार में ऐसा कोई काम नहीं है जो सिर्फ बेटे ही कर सकते हैं, बेटियां नहीं। ऐसा मानने वालों को अब सोच बदलनी होगी। विद्यालय में शिक्षा व संस्कार के साथ ही आत्मरक्षा का भी प्रशिक्षण मिलना चाहिए ताकि बेटियां स्वयं सुरक्षित रहकर सभी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा व दमखम दिखा सकें।
-श्वेता पांडेय
बेटियों को ज्ञान के लिए मां सरस्वती व शक्ति के लिए काली की आराधना करनी चाहिए ताकि समय पड़ने पर वे अपने ज्ञान के बल पर बड़ी से बड़ी मुश्किलों से निपट सकें। जरूरत पड़े तो वे अपने बलबूते दूसरे को शिकस्त भी दे सकें। इसलिए शिक्षा के साथ ही जानकारी भी जरूरी है।
-पुष्पा आर्या
अमर उजाला का यह प्रयास सराहनीय है। विद्यालयों में बच्चियों को दी जाने वाली इन जानकारियों से वे आत्मरक्षा व सुरक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हो सकेंगी। ऐसे में बेटियों के विद्यालय आने-जाने पर माता-पिता उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं रहेंगे।
-शालिनी साहू
हमें शिक्षकों से विद्या मिल रही है। आज हमें आत्मरक्षा के लिए तैयार रहने के लिए जो सीख मिली, यह हमारे जीवन के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे में अमर उजाला का यह अनूठा प्रयोग हमारी शारीरिक व मानसिक क्षमता को बढ़ाने में कारगर साबित होगा।
-सरिता मिश्रा
बेटियों के सामने सिर्फ आत्मरक्षा का ही नहीं विद्यालय आते-जाते अन्य खतरा भी रहता है। ऐसे में हम जागरूक हो सूझ-बूझ से खतरे का डट कर सामना कर सकेंगे। साथ ही आत्मरक्षा का प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे जिससे आवश्यकता पड़ने पर अपनी सुरक्षा भी कर सकेंगे।
-लक्ष्मी जायसवाल
आज इस कार्यक्रम में हमने बहुत कुछ सीखा। इसका हमारे जीवन में पूरा लाभ मिले, इसके लिए आवश्यक है कि हम शिक्षा व सुरक्षा के तरीके सीखने के साथ ही अपनी सेहत का भी ख्याल रखें। जब हम स्वस्थ होंगे तभी हम शिक्षित व सुरक्षित भी हो सकेंगे।
-अंजलि निषाद
सरकार बेटियों की शिक्षा व सुरक्षा के प्रति गंभीर है। इसका परिणाम है कि सभी सरकारी विद्यालयों में बेटियों को निशुल्क शिक्षा दिलाने के साथ ही उनके बेहतर स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में सभी माता-पिता अपनी बेटियों को विद्यालय जरूर भेजें।
-अनुष्का शुक्ला
विद्यालय में मिली जानकारी का पूरा लाभ मिले, इसके लिए हम सभी छात्राओं को इसका अनुपालन करना होगा। इसके साथ ही घर पर अपने भाई-बहनों व सहेलियों के साथ अनुभव साझा करते हुए उन्हें भी अमर उजाला की इस मुहिम से जोड़ेंगे।
-पम्मी पांडेय
बालिकाओं के लिए जितना आवश्यक शिक्षा है, उतना ही आवश्यक है कि वे आत्मनिर्भर भी बन सकें। यह तभी संभव है जब उन्हें शिक्षा के साथ ही सुरक्षा आदि के बारे में भी जानकारी मिले। अमर उजाला का प्रयास निश्चित ही बालिकाओं के जीवन में बदलाव लाएगा।
- दिव्या पांडेय
शिक्षा के लिए आवश्यक है कि मन व मस्तिष्क स्वस्थ रहे। किसी प्रकार का भय दिल व दिमाग में न हो। विद्यालय में शिक्षा मिलने के बाद भी सुरक्षा को लेकर कहीं न कहीं मन में भय बना रहता है। आत्मरक्षा व बेहतर स्वास्थ्य के संबंध में मिली जानकारी से निश्चित ही हमारा आत्मबल बढ़ेगा।
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-सुषमा
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