बहराइच व श्रावस्ती की पगडंडियां बनी सहारा
नेपाल के सूत्रों की मानें तो तस्कर बहराइच जिले के गंगापुर, गुलरिहा समेत कई खुली पगडंडियों के रास्ते खाद को बॉर्डर पार पहुंचाते हैं। दिन के समय जहां छोटी-छोटी बोरियों में खाद को खेतों में छिड़काव का बहाना बताकर पार करवाया जाता है तो वहीं रात के समय पूरी की पूरी बोरी पार करवा देते हैं। तस्कर खाद को बहराइच के नवाबगंज, नूरी चौराहा, बाबागंज और श्रावस्ती के मल्हीपुर, माल्ही चौराहा आदि के पास स्थित निजी व सहकारी समितियों से खरीदते हैं।
सबको मिलता है मुनाफे में हिस्सा
सूत्रों की मानें तो तस्कर सीमा से सटे भारतीय क्षेत्र की दुकानों से 350 से 450 रुपये में एक बोरी यूरिया खाद खरीदते हैं। इससे बिक्रेता को एक बोरी पर 120 से लेकर लगभग 200 रुपये तक मुनाफा मिलता है। तस्कर 100 रुपये से 150 रुपये देकर यूरिया को बार्डर पार करवाते हैं और फिर उसे क्षेत्रीय दुकानदारों को बेंच देते हैं। नेपाल के स्थानीय दुकानदार अपना मुनाफा जोड़ कर 267 रुपये में भारतीय क्षेत्र में मिलने वाली सब्सिडी युक्त यूरिया को 1800 रुपये से 2000 रुपये में बेंचते हैं।
रात में बेंचते थे खाद, हुई थी कार्रवाई
तराई से यूरिया तस्करी कोई पहली बार नहीं है। धान के सीजन में भी बड़े पैमाने पर यूरिया तस्करी के आरोप लगे थे। भारतीय क्षेत्र में यूरिया के लिए लंबी-लंबी लाइन लग रही थी और नेपाल में धड़ल्ले से अनुदानित यूरिया बिक रही थी। लगातार शिकायत पर शासन की ओर से ई-पॉश मशीन की जांच करवाई थी, जिसमें 29 दुकानों में रात में खाद बिक्री होने का खुलासा हुआ था। जिसके बाद शासन के निर्देश पर 12 दुकानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए थे और 17 को नोटिस जारी किया गया था। शासन की कार्रवाई के बाद भी यूरिया तस्करी का जारी रहना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।