श्रावस्ती। तराई में रविवार को लगभग पांच किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बर्फीली हवा चली, इससे पूरे दिन लोग ठिठुरते रहे। दिनभर धूप नहीं निकली, गलन बरकरार रही। इससे लोग हीटर व अलाव के इर्द-गिर्द बैठे रहे।
तराई में शनिवार रात से ही हवा की रफ्तार बढ़ गई है। रविवार सुबह तराई कोहरे की चादर में भी लिपटी रही, जिसके चलते ठिठुरन बढ़ी रही, ज्यादातर लोग घर में कैद रहे। सड़क पर दृश्यता घटने से वाहनों की रफ्तार थमी रही, वाहन चालक फाॅग लाइट के सहारे गुजरते दिखे।
बर्फीली हवा के चलते रविवार को अधिकतम तापमान एक डिग्री लुढ़क कर 17 डिग्री पहुंच गया। हालांकि न्यूनतम तापमान 10 डिग्री बना रहा। बताते चलें कि शनिवार को तराई का अधिकतम तापमान 18 डिग्री व न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस था।
बोले लोग- दिसंबर में वर्षों बाद इतनी ठंड
बहराइच से भिनगा पहुंचे बाइक सवार अटल सिंह ने बताया कि फुल जेकेट, दस्ताना व हेलमेट आदि पहनने के बाद भी गलन का अहसास हो रहा है। इससे बचने के लिए रास्ते में दो जगह रुक कर अलाव का सहारा लेना पड़ा। गिलौला निवासी प्रदीप गुप्ता ने बताया कि कई वर्षों बाद दिसंबर महीने में लगातार इतने दिनों तक ठंड पड़ी है। बताया कि उन्हें दिल्ली जाना है, लेकिन गलन के चलते उन्होंने यात्रा रद्द कर दी। भिनगा से अपनी बहन के घर गिलौला जा रहे अधिवक्ता अनुज ने बताया कि तीन दिन से यात्रा रद्द कर रहे थे, लेकिन अब मजबूरन जाना पड़ रहा है। गलन के साथ हवा सबसे ज्यादा परेशान कर रही है।
सरसों व सब्जी की फसल को हो सकता है नुकसान
भंगहा निवासी किसान अंकुर, गिलौला निवासी अखिलेश, सुरेश व दीपचंद आदि ने बताया कि गेहूं के लिए कोहरा व ठंड फायदेमंद है, लेकिन सरसों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। कई दिनों से बादल व कोहरा है, इससे सरसों में रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। तेज हवा से फूल भी झड़ रहे हैं। किसानों ने बताया कि विभिन्न सब्जियों के लिए भी गलन व पाला नुकसानदायक है।