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बीज अनुदान राशि के वरिष्ठ लिपिक ने किया गबन

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श्रावस्ती। उप कृषि निदेशक कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक लिपिक ने किसानों के बीज अनुदान के धन का गबन कर लिया। इस पर वरिष्ठ सहायक लिपिक को निलंबित कर दिया गया है। प्रथम दृष्टया 25 लाख रुपये के गबन की पुष्टि भी हो गई है। मामले में जांच अभी जारी है। इससे मामला लगभग एक करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। गबन की गई राशि को वरिष्ठ लिपिक ने अपने चहेतों व रिश्तेदारों के खाते में स्थानांतरित कर दिया। इस गबन में तात्कालिक उप निदेशक कृषि की भी संलिप्तता बताई जा रही है।
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कृषि विभाग किसानों को बीज खरीद के लिए अनुदान देता है। इसके लिए उप कृषि निदेशक कार्यालय में एनएफएसएम पटल बना हुआ है। इससे किसानों के खाते में सीधे पैसा भेजा जाता है। इस पटल पर तैनात वरिष्ठ सहायक लिपिक नवनीत यादव ने किसानों के खाते में अनुदान का पैसा भेजने के बजाए अपने चहेतों व अन्य रिश्तेदारों के खातों में भेज दिया। जांच में प्रथम दृष्टया करीब पच्चीस लाख रुपये के गबन की पुष्टि हुई है।
वहीं सूत्रों के अनुसार यह राशि लगभग एक करोड़ रुपये के आसपास है। इस मामले में वरिष्ठ लिपिक के साथ ही तात्कालिक उप निदेशक कृषि की भी संलिप्तता बताई जा रही है। उनके डोंगल से ही इस धन का गबन किया गया है।
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ऐसे हुआ गबन
जांच में उजागर तथ्यों के अनुसार किसानों के खाते में पैसा भेजने के लिए उनके खाता संख्या में त्रुटि की गई। इसके चलते पैसा खातों में पहुंचने के बजाए रिजेक्ट हो गया। बाद में खाता सही करने के नाम पर इसके नंबर में फेर बदल किया गया। वहीं दूसरा तथ्य यह भी सामने आ रहा है कि चहेतों का फर्जी खाता नंबर गबन के लिए ही फीड किया गया।
पांच खातों में गई सर्वाधिक राशि
जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सहायक वरिष्ठ लिपिक की ओर से बीज अनुदान का सर्वाधिक पैसा पांच खातों में ही भेजा गया है। इसकी जांच की जा रही है।
दो साल से तैनात आरोपी लिपिक
उप कृषि निदेशक कार्यालय में आरोपी लिपिक नवनीत यादव 2018 से तैनात है। तभी से वह किसानों के खातों में अनुदान भेजने का पटल देख रहा है। जांच में प्रथम दृष्टया केवल वर्ष 2019 के मामलों का खुलासा हुआ है। जांच समिति इस बात की भी जांच कर रही है कि कहीं इसी तरह का खेल 2018 में भी अनुदान भेजने में गबन तो नहीं हुआ।
किसानों की शिकायत पर खुला मामला
पीएफएमएस के माध्यम से किसानों के खाते में बीज व अन्य कृषि अनुदान का पैसा वर्ष 2016 से भेजा जा रहा है। शुरुआती दौर से ही किसान लगातार इस बात की शिकायत करते रहे हैं कि उनके खातों में पैसा नहीं पहुंचा। वहीं विभाग का दावा था कि पैसा खाते में भेजा गया। वर्ष 2018 से ही यह शिकायतें बढ़ गई थी, लेकिन इन पर तात्कालिक उप निदेशक कृषि ने ध्यान नहीं दिया। वहीं कुछ दिन पूर्व जब किसानों ने खाते में पैसा न पहुंचने की शिकायत किया तो मामले की जांच हुई। इसी के बाद इस घोटाले का खुलासा हुआ।
ऐसे भेजा जाता पैसा
अनुदान भेजने के लिए विभाग की ओर से दो डोंगल बनाए गए हैं। एक डोंगल पटल सहायक या फिर विभाग के अकाउंटेंट के पास होता है। इस डोंगल के माध्यम से वह लाभार्थियों का नाम व राशि अपलोड करता है। जबकि दूसरा डोंगल विभागाध्यक्ष के पास होता है। इसे लगाने के बाद पैसे का अंतरण खातों में होता है। गबन में दोनों डोंगल का इस्तेमाल किया गया। उस समय उप कृषि निदेशक के पद पर यशपाल तैनात थे। जिनके समय में यह गबन हुआ।
मामले की जांच की जा रही है। प्रथम दृष्टया गबन की पुष्टि हुई है। इसलिए आरोपी वरिष्ठ सहायक लिपिक नवनीत यादव को निलंबित कर दिया गया है। जांच पूरी होने के बाद ही इस तथ्य की पुष्टि हो पाएगी कि कुल कितनी राशि का कितने दिनों में गबन हुआ। - आरपी रानास उप कृषि निदेशक
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