श्रावस्ती। विद्युत निगम अपने केवल एक डिवीजन भिनगा से ही खुद को प्रतिमाह छत्तीस लाख रुपये का चूना लगा रहा है। यह नुकसान भिनगा डिवीजन के ग्रामीण क्षेत्र के उपभोक्ताओं की बिलिंग से हो रहा है। वहां सिस्टम से पांच सौ के बजाय पचास रुपये प्रतिमाह की दर से बिल जेनरेट हो रहे हैं। इस डिवीजन में पावर कार्पोरेशन के करीब आठ हजार ग्रामीण उपभोक्ता हैं।
राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना प्रारंभ होते ही जिन-जिन गांवों का विद्युतीकरण हो गया था, वहां-वहां बीपीएल कार्ड धारकों को निशुल्क कनेक्शन भी दे दिए गए। यह सिलसिला लगातार चलता रहा। ऐसे में देखा जाए तो केवल भिनगा उपकेंद्र पर ही लगभग आठ हजार ग्रामीण उपभोक्ता हैं जिनके दरवाजे पर मीटर लगा हुआ है लेकिन उनका बिल प्रतिमाह मात्र पचास रुपये ही कंप्यूटर बनाता है। इसका कारण यह कि इन उपभोक्ताओं के दरवाजे पर लगे मीटर की रीडिंग लेने के लिए आज तक कोई कर्मचारी गया ही नहीं।
उपभोक्ता खुशी-खुशी 50 रुपये बिल जमा कर मोटर, हीटर व अन्य उपकरण चला रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कंप्यूटर फाल्ट की वजह से निकले इस बिल के सापेक्ष मीटर की वास्तविक रीडिंग कहीं ज्यादा होती है। वास्तविक भुगतान उपभोक्ताओं को तब करना होगा जब कभी अभियान चलाकर इसकी रीडिंग होगी। ऐसे में देखा जाए तो विद्युत निगम मौजूदा समय में प्रतिमाह केवल भिनगा उपकेंद्र पर ही चालीस लाख के सापेक्ष मात्र चार लाख रुपये का बिल बना रहा है।
निगम छत्तीस लाख रुपये का घाटा एक उपकेंद्र से स्वयं ही करता है। श्रावस्ती जिले में भिनगा व इकौना डिवीजन हैं। यही स्थिति इकौना डिवीजन की भी है। यदि पूरे जिले में विद्युत निगम के घाटे को देखा जाए तो वह आंकड़ा करोड़ों में पहुंच रहा है। यही नहीं एक ओर जहां विद्युत निगम स्वयं ही अपना खजाना लुटाने पर आमादा है, वहीं उपभोक्ताओं के सिर पर भी रीडिंग के जरिये बोझ लदता चला जा रहा है जिसका खामियाजा उन्हें भविष्य में भुगतना होगा।
ग्रामीण उपभोक्ताओं से प्रति यूनिट तीन रुपये, फिक्स चार्ज पचास रुपये, एफडी चार्ज पांच प्रतिशत व आरसीएच चार्ज 4.2 प्रतिशत लेने का प्रावधान है। ऐसे में औसतन प्रति उपभोक्ता पांच सौ रुपये प्रतिमाह का बिल जेनरेट होना चाहिए।
ग्रामीण क्षेत्रों में विद्युत निगम ने मीटर तो लगा दिया लेकिन उसकी रीडिंग नहीं करा पा रहा है। ऐसे में सात से दस वर्ष पुराने उपभोक्ताओं का मीटर तो चल रहा है लेकिन उसकी रीडिंग ली ही नहीं गई जिसके चलते कंप्यूटर सिर्फ 50 रुपये ही बिल जनरेट कर रहा है।
लगभग बारह वर्ष पूर्व राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत गरीबों को निशुल्क कनेक्शन दिया गया था। उसी समय सभी उपभोक्ताओं के घर पर मीटर भी लग गया था। तभी से कोई भी निगम कर्मी मीटर रीडिंग करने गया ही नहीं। यही नहीं ग्रामीणों को भी इसकी जानकारी नहीं है कि उन्हें स्वयं रीडिंग लेकर उपकेंद्र जाना चाहिए।
ऐसे में उपभोक्ताओं का मीटर तो चल रहा है लेकिन उसके मुताबिक बिल नहीं आ रहा है। कभी मीटर की रीडिंग हुई तो उपभोक्ताओं को कम से कम डेढ़ से दो लाख रुपये के वास्तविक बिल का भुगतान करना होगा। उस बिल की भरपाई वह अपना घर बेच कर भी नहीं कर पाएंगे।
पावर कार्पोरेशन के अधिशाषी अभियंता आरएस मौर्य ने बताया कि सिस्टम में कुछ खराबी होने के कारण यह समस्या आ रही है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों की रीडिंग भी नहीं आ पा रही है। बिलिंग का ठेका जिस कंपनी को मिला है। उसको पत्र लिख कर ग्रामीण क्षेत्रों में रीडिंग करने को कहा जा रहा है।