श्रावस्ती। बच्चे राष्ट्र के भाग्य विधाता हैं। उन्हें शिक्षित कर उनके भाग्य को संवारना शिक्षकों का दायित्व है। सरकार बच्चों को सभी सुविधाएं मुहैया करा रही है। ऐसे में शिक्षकों का फर्ज बनता है कि वह अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव लाकर अपने दायित्व का निर्वहन करें और शिक्षा के स्तर को उठाने में योगदान दें।
यह बातें कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम ओपी आर्य ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहीं। उन्होंने कहा कि विद्यालय के आसपास के गांवों में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहें। उन्होंने बीएसए से लेकर बीईओ, बीआरसी व एनपीआरसी सहित सभी अधिकारियों को स्कूलों की मॉनिटरिंग करके दो माह में बच्चों की शिक्षा के स्तर में सुधार लाने का निर्देश दिया।
वहीं 6 से 14 साल तक के ऐसे बच्चों को चिह्नित कर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया, जिनका स्कूल में दाखिला नहीं हुआ है। कहा कि विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य भी अध्यापकों को बताएंगे कि गांव में किन लोगों के बच्चे स्कूल से वंचित हैं। यह सारा कार्य जल्द से जल्द पूरा करें, जिससे अधिकाधिक नामांकन कराया जा सके।
बीएसए को निर्देश दिया कि शिक्षकों की उपस्थिति, शैक्षिक गुणवत्ता एवं मासिक कलेंडर के अनुसार विद्यालयों में पठन पाठन की व्यवस्था कराएं। ज्यादा नामांकन कराने के लिए जिले के अधिकारी, बीईओ, शिक्षक, शिक्षामित्र व विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों सहित क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष, बीडीसी सदस्य का सहयोग लेने को कहा।
डीएम ने बैठक में यूनीफॉर्म, पुस्तक, स्कूल बैग, जूता मोजा वितरण सहित मध्याह्न भोजन के बारे में भी समीक्षा की। इस मौके पर सीडीओ अवनीश राय, बीएसए ओमकार राणा, सभी बीईओ, जिला समन्वयक सर्व शिक्षा अभियान अजीत उपाध्याय आदि मौजूद रहे।