मदरसे की जांच करने पहुंचे एसडीएम व सीओ।
श्रावस्ती। इकौना देहात में विगत आठ वर्ष से आवासीय मदरसा जामिया नूरिया फातिमा लिल्बनात बगैर मान्यता संचालित हो रहा है। बृहस्पतिवार को एसडीएम एवं सीओ मदरसे की जांच करने पहुंचे। उन्होंने संचालक से 10 मई तक मदरसा बंद करने का लिखित पत्र लिया। इसके बाद बगैर सील किए छोड़ दिया।
जिले में बगैर मान्यता व सार्वजनिक भूमि पर बने मदरसों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। वहीं, इसके विपरीत इकौना देहात में बगैर मान्यता संचालित मदरसा जामिया नूरिया फातिमा लिल्बनात पर कार्रवाई न होना कई सवाल पैदा कर रहा है। इस मदरसे का संचालन विगत आठ वर्ष से प्रबंधक सैयद सिराजुद्दीन हाशमी निवासी ढबोई दोधरा गुजरात की ओर से किया जा रहा है।
बृहस्पतिवार को सीओ इकौना सतीश कुमार के साथ छापामारी करने पहुंचे एसडीएम ओम प्रकाश के पूछने पर प्रबंधक ने बताया कि स्थानीय व आसपास के लोगों से चंदा लेकर इस मदरसे को संचालित किया जाता है। यह मदरसा निजी भूमि गाटा संख्या 1354 में स्थित है। जांच में पता चला कि यहां 300 छात्राएं रहकर उर्दू व अरबी, हिंदी तथा अंग्रेजी आदि की शिक्षा ग्रहण करती हैं। प्रबंधक ने पत्र देकर बताया कि वर्तमान में यहां शिक्षण कार्य नहीं किया जा रहा है। विद्यालय की मान्यता नहीं है। मैं परिवार सहित यहां रहता हूं। यहां आने वालों के लिए दुआ करता हूं। बिना किसी विधिमान्य आदेश के मदरसे का संचालन नहीं करुंगा। 10 मई तक मदरसे में ताला लगा दूंगा। मदरसे में पढ़ने वाली छात्राओं को उनके घर भेज दिया गया है।
टीम के अंदर जाकर देखने पर मदरसे में छात्राओं के संदूक व अन्य सामान रखे थे। इस बारे में प्रबंधक ने बताया की छात्राओं को सूचना दी गई है। वह अपने परिजनों के साथ आकर सामान ले जाएंगी। इस पर टीम मदरसे को सील किए बगैर वापस चली आई। प्रशासन की यह कार्रवाई कई सवाल पैदा कर रही है। डीएम अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि अभी सार्वजनिक भूमि पर बने मदरसों को सील कराया जा रहा है। अन्य बगैर मान्यता संचालित मदरसों को नोटिस दी जा रही है। तय समय में यदि वह औपचारिकता पूरी नहीं कर पाते तो सील किया जाएगा।