जेतवन परिसर में पूजा करते थाईलैंड के अनुयायी
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में बृहस्पतिवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 120 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु अचान पवात के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से जेतवन परिसर में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा संबोधित करते हुए भिक्षु अचान पवात ने कहा कि आप सभी साधना से अपने जीवन को सफल बनाएं और विश्व शांति की कामना करें। भगवान बुद्ध भी बचपन में सिद्धार्थ नामक राजकुमार थे और उन्होंने आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग किया था। छह वर्षों की कठोर तपस्या के बाद ज्ञान प्राप्त किया। यह ज्ञान ही बौद्ध धर्म का आधार बना, जो पूर्ण ज्ञान और असीम करुणा का संगम है। अनुयायियों के संबंध में जानकारी देते भिक्षु ने बताया कि ये दल भगवान बुद्ध के उन पवित्र स्थलों पर साधना करता है, जहां उन्होंने अपने जीवन का महत्वपूर्ण समय बिताया। दल में शामिल अनुयायी जमीन पर सोकर और ध्यान के माध्यम से अपनी साधना को गहरा कर रहे हैं।