श्रावस्ती। दिव्यांगों के लिए पुनर्वास केंद्र वरदान साबित हो रहा है। यहां जिनके अंग नहीं उनको कृत्रिम अंग मिल रहा है। अब तक जो दूसरों पर निर्भर थे। वह रोजगार से जुड़ कर व्यापारी बन गए। डीएम के इस नई पहल से जिले में धीरे-धीरे दिव्यांगों की सूरत बदल रही है।डीएम नेहा प्रकाश ने कुछ माह पूर्व जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र को क्रियाशील किया था। इसी के साथ ही दिव्यांगों के पुनर्वासित करने के लिए सभी योजनाओं से इसको जोड़ दिया। अब यह नई पहल का लाभ दिव्यांगों को मिलने लगा है। संयुक्त जिला चिकित्सालय में संचालित केंद्र में फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी की सुविधा मिलती है। इसके साथ ही केंद्र में ही कृत्रिम अंग के साथ ही इन्हें दिव्यांगता प्रमाण पत्र व यूनिक आईडी भी प्रदान की जाती है। शनिवार को डीएम ने दिव्यांग हसीबुन निशा को यूनिक आईडी व रवि को सुनने की मशीन प्रदान की।
वहीं निरंजन प्रसाद निवासी बनकटवा खुर्द को पुनर्वास केंद्र के माध्यम से मोटर ट्राई साइकिल निशुल्क मिली थी। जिसमें वे बॉक्स लगवाने के बाद सब्जी मसाला रख कर बेचते हैं। प्रतिदिन उन्हें तीन से चार सौ रुपये का मुनाफा हो जाता है। इसी प्रकार एक दर्जन अन्य दिव्यांगों के लिए भी पुनर्वास केंद्र वरदान साबित हो रहा है। इस संबंध में डीएम नेहा प्रकाश का कहना है कि मेरा लक्ष्य इस वर्ष कम से कम 25 दिव्यांगों को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ना है।