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फर्जी शिक्षक खोजने के लिए खंगाले जा रहे अभिलेख

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श्रावस्ती। परिषदीय विद्यालय में नौकरी करने वाले फर्जी शिक्षकों की तलाश तेज कर दी गई है। इसके लिए 2010 से तैनात सभी शिक्षकों के अभिलेख खंगाले जा रहे हैं। इन अभिलेखों का मिलान पहले आवेदन पत्र से होगा, इसके बाद उसका सत्यापन कराया जाएगा। जिले में यह प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। यही नहीं संदिग्ध अध्यापकों की अलग सूची बनाई जा रही है। जिनके अभिलेखों की जांच विशेष तौर पर होगी।
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जिले में फर्जी शिक्षकों की तैनाती कोई नया मामला नहीं है। पूर्व में जिले में छह फर्जी शिक्षक नौकरी करते मिले थे। इसमें से पांच शिक्षक तो दूसरे के नाम पर नौकरी कर रहे थे, जबकि एक शिक्षक ने दूसरे व्यक्ति के अभिलेखों का इस्तेमाल किया था। इन सभी के खिलाफ एफआईआर हो चुकी है। इसके बाद भी अभी भी फर्जी अभिलेखों के सहारे नौकरी करने वाले शिक्षक जिले में होने की बात कही जा रही है। इसका आधार है कि कुछ दिन पूर्व बीएसए ने बीस शिक्षकों के नाम की सूची जारी की गई थी।
जिन्हें संदिग्ध माना गया था। इसमें से मात्र दो शिक्षकों की जांच बीएसए ने खुद की थी, जिनके अभिलेख फर्जी पाए गए थे। जिन्हें बर्खास्त कर जेल भेजा गया था। 18 शिक्षक ऐसे हैं जिनकी जांच प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो पाई। ऐसे शिक्षकों पर विभाग की पहले से ही नजर थी। वहीं अब फर्जी शिक्षकों की तलाश के लिए 2010 से तैनात शिक्षकों के अभिलेख की जांच होगी। इसकी प्रक्रिया जिले में प्रारंभ हो गई है। जांच दो चरणों में होगी। पहले चरण में शिक्षकों की ओर से किए गए मूल आवेदन में भरे गए तथ्य व अभिलेखों का मिलान किया जाएगा।
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इसके बाद शिक्षक की ओर से प्रस्तुत अभिलेख का सत्यापन प्रमाण पत्र जारी करने वाले संस्थानों से होगा। मूल अभिलेख व आवेदन पत्र की जांच का आधार यह बताया जा रहा है कि जिले में पाए गए फर्जी शिक्षक अजीत शुक्ल के मामले में शिक्षक पात्रता परीक्षा का अभिलेख अजीत के नाम से था, लेकिन उसमें पिता का नाम दूसरा था। जबकि आवेदन में उसने अपने पिता का नाम सही भरा था। जब आवेदन व शैक्षिक अभिलेख में पिता के नाम का मिलान किया गया तो फर्जी अभिलेख की जानकारी हुई। इसीलिए विभाग उस अनुभव का उपयोग सभी शिक्षकों के अभिलेखीय सत्यापन में करेगा।
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में भी फर्जी शिक्षक का संदेह
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में भी फर्जी शिक्षकों हो सकते हैं। इसीलिए विभाग इसकी जांच के लिए सभी शिक्षकों के अभिलेख जमा कर रहा है। इस अभिलेख का सत्यापन कराया जाएगा। वहीं एक विद्यालय में तैनात उर्दू शिक्षक पर फर्जी होने का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि फर्जी शिक्षक की नियुक्ति 2007 में उर्दू शिक्षक के रूप में दर्शायी गई। उस समय कस्तूरबा विद्यालय में उर्दू अध्यापक का पद सृजित ही नहीं था। वर्ष 2012 में कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के लिए उर्दू शिक्षक के पद का निर्धारण किया गया। उस समय शिक्षक पात्रता परीक्षा अनिवार्य कर दी गई थी, लेकिन जिले में तैनात अध्यापक ने शिक्षक पात्रता परीक्षा पास ही नहीं की है। ऐसे में शिक्षक को फर्जी बताया जा रहा है।
जिले में तैनात 2010 से लेकर अब तक के सभी शिक्षकों के अभिलेख सत्यापित किए जाएंगे। यही नहीं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के भी शिक्षकों के अभिलेख सत्यापित करने के लिए कमेटी बनाई गई है। हम सभी बिंदुओं को देख रहे हैं। यदि कोई भी कमी सामने आएगी तो आरोपी के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। - ओमकार राणा, बीएसए
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