श्रावस्ती। तराई में मेघ मेहरबान हैं। रविवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार को भी रुक रुक होती रही। नेपाल सहित पहाड़ों में हुई झमाझम बरसात के कारण राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। इससे कछारवासियों की धड़कने तेज हो गई। राप्ती बैराज पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र दो सेमी नीचे रह गया था।
इसके बाद नदी का जलस्तर घटा तो कछार वासियों ने राहत की सांस ली। वहीं ककरदरी घाट में पानी बढ़ जाने के कारण उससे सटे गांव के लोग नाव के सहारे गांव आ जा रहे हैं। उधर रिमझिम तो कभी झमाझम बरसात के कारण कई स्थानों पर मार्ग व उसकी पटरियां कट गई। वहीं जगह-जगह जलभराव व कीचड़ के कारण लोगों की मुश्किलें बढ़ गई है।
जिले में रविवार रात से शुरू हुई बारिश बुधवार को भी रुक रुक कर जारी रही। झमाझम तो कभी रिमझिम बारिश के कारण समूची तराई पानी से तरबतर है। लगातार बादल छाए होने व बारिश के कारण मौसम का मिजाज पूरी तरह नर्म हो गया है। वहीं नेपाल सहित पहाड़ों पर हो रही बरसात के कारण जिले में पहाड़ी नाले उफान पर हैं।
लगातार बरसात के कारण मंगलवार से राप्ती का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। इससे नदी के कछार में बसे गांवों में रहने वालों की धड़कने अचानक तेज हो गई। राप्ती बैराज पर बुधवार की सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 127.68 सेंटीमीटर पर पहुंच गया। जो खतरे के निशान से मात्र 2 सेंटीमीटर नीचे रहा।
यहां खतरे का निशान 127.70 मीटर पर है। इसके बाद से नदी का जलस्तर पांच सेंटीमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से अचानक घटने लगा। सुबह 9 बजे बैराज पर नदी का जलस्तर 127.65 व 10 बजे 127.60 सेंटीमीटर मापा गया।
जलस्तर घटने के बाद कछार वासियों ने राहत की सांस ली। वहीं ककरदरी घाट में पानी बढ़ जाने के कारण उससे सटे गांव बरगदहा के हरिहर पाझा, घुमना पाझा, रामपुर पाझा, महत्व पाझा सहित आसपास के ग्रामीण नाव के सहारे गांव आ जा रहे हैं। बढ़ते जलस्तर को देख ग्रामीण आशंकित नजर आ रहे हैं।
धान व सब्जियों को फायदा, मेंथा किसान परेशान
जिले में लगातार रुक रुक हो रही बरसात से खेतों में पर्याप्त पानी भर गया है। इसे देखकर किसानों के चेहरे खिल गए है। किसान बिना समय बर्बाद किए धान की रोपाई करने में जुटे हुए हैं। वहीं इस बरसात का मक्का, गन्ना, अरुई, भिंडी, लौकी, तरोई, लोबिया, बैगन सहित अन्य सब्जियों की फसलों को फायदा मिला है। हालांकि इस बरसात ने मेंथा की फसलों में जहर घोल दिया है। जिससे किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें देखी जा रही है।
रेहली गांव के पास कटा मार्ग, बह रहा पानी
जिले में लगातार हो बरसात के कारण भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग रेहली गांव के निकट कट गया था। जहां डिप बन गया है। लगातार बरसात के कारण केन नाले में उफान के चलते जंगल का पानी मार्ग पर बह रहा है। इससे एक बार फिर मार्ग पर आवागमन बाधित हो गया है। वहीं भिनगा बहराइच फारेलेन पर पटरियों की मिट्टी बह जाने के कारण दिकौली सहित कई अन्य स्थान पर मार्ग धंस गया है।
जमुनहा बहराइच मार्ग पर पटरियां कटने व उल्टहवा पुल के निकट अप्रोच मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण दुर्घटना की संभावना बढ़ गई है। वहीं जमुनहा कानीबोझी मार्ग पर राप्ती बैराज के निकट मोड़ पर पटरी की मिट्टी बह जाने से मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके चलते बुधवार को परसा डेहरिया जा रही प्राइवेट बस पलटने से बाल-बाल बची।
सफाई न होने से बढ़ी परेशानी
भिनगा व इकौना नगर सहित जिले के अन्य कस्बाें व गांव में बरसात के पहले सफाई अभियान नहीं चलाया गया। प्री मानसून की बरसात के कारण नगर सहित गांवों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई थी। इस पर आनन फानन में नालियों की सफाई कराकर उसका मलवा किनारे रख दिया गया।
इसे न हटाए जाने के कारण आए दिन हो रही बरसात से नालियों के किनारे रखा मलवा बरसात के पानी के साथ बहकर नालियों में फिर भर गया है। इससे नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
ककरदरी घाट में पानी बढ़ जाने के कारण उससे सटे गांव बरगदहा के हरिहर पाझा, घुमना पाझा, रामपुर पाझा, महत्व पाझा सहित आसपास के ग्रामीण नाव के सहारे गांव आ जा रहे हैं। बढ़ते जलस्तर को देख ग्रामीण आशंकित नजर आ रहे हैं।