तुलसीपुर। तराई क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण राप्ती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी खतरे के लाल निशान के करीब पहुंच गई है। इससे तटवर्ती गांवों के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
नेपाल के पहाड़ों और तराई के मैदानी क्षेत्रों में बीते तीन दिनों से रुक-रुक कर बारिश हो रही है। दो दिन झमाझम बारिश हुई, जबकि सोमवार को दिन भर रिमझिम फुहारें पड़ीं। इसका सीधा असर राप्ती नदी के जलस्तर पर देखने को मिल रहा है। रविवार को लक्ष्मणपुर कोठी बैराज पर राप्ती का जलस्तर 126.90 मीटर दर्ज किया गया था। सोमवार सुबह यह बढ़कर 127.00 मीटर और दोपहर में 127.10 मीटर पहुंच गया। अकेले सोमवार को शाम तक जलस्तर 20 सेमी बढ़कर 127.20 मीटर पर आ गया। इस तरह, 24 घंटे में कुल 30 सेमी की वृद्धि दर्ज की गई है। यह खतरे के लाल निशान 127.70 मीटर से सिर्फ 50 सेमी कम है।
दर्जनों गांवों पर मंडराया बाढ़ का संकट
राप्ती नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी से दर्जनों गांवों पर बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। कथरा माफी गांव में सड़कों के किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहे ग्रामीण भयभीत हैं। ये वे लोग हैं जो 10 साल पहले आई भीषण बाढ़ में हसनापुर गांव के कटान से विस्थापित हुए थे। उन्हें कथरामाफी में बाढ़ का पानी भरने पर फिर से विस्थापित होने का डर सता रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों में गजोबरी, बंदरा, टेपरा, मोहनपुर और भरथा शामिल हैं। हसनापुर, बरगा, सलारूपुरवा, घाटेपुरवा और वीरपुर के ग्रामीण भी चिंतित हैं। लौकिहा, शिकारीचौड़ा, जोगिया, भगवानपुर, पोंदिला, पोंदिली और लक्ष्मनपुर भी प्रभावित हो सकते हैं। राप्ती में तेजी से बढ़ रहे जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।