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खरीद एजेंसियों ने किसानों के 9.56 करोड़ दबाए

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श्रावस्ती। गेहूं खरीद एजेंसियां किसानों का नौ करोड़ 56 लाख 92 हजार रुपये दबाए बैठी हैं। वहीं किसानों को खेती के लिए पैसों की आवश्यकता है। किसान कभी खरीद केंद्र तो कभी बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। इसके बाद भी उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। इससे वह परेशान हैं।
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किसानों ने गेहूं की फसल क्रय केंद्रों पर बेच दिया है। खेत खाली होने के बाद अब किसान अगली फसल बोने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन उनकी तैयारी गति नहीं पकड़ पा रही है। इसका कारण है कि फसल बेचने के बाद भी किसानों का हाथ खाली होना है।
किसानों को अपने उपज बेचने के बाद भी उसका अभी तक पूरा भुगतान नहीं मिला है। यदि विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक जिले के 34 क्रय केंद्रों पर 3433 किसानों ने अपनी फसल बेची है। इस पर उनको 32 करोड़ 76 लाख 39 हजार रुपये भुगतान होना था।
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इसके सापेक्ष उन्हें 23 करोड़ 19 लाख 47 हजार रुपये अब तक दिया गया है। अभी भी किसानों का नौ करोड़ 56 लाख 92 हजार रुपये बाकी है। इसके चलते किसान अपनी अगली खेती की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। इसके साथ ही लॉकडाउन में उनके सामने दैनिक खर्च को लेकर समस्या है।
क्रय केंद्रों पर खरीद व भुगतान की स्थिति बेहतर नहीं है। इसीलिए किसानों का रुख क्रय केंद्रों के प्रति ठीक नहीं है। किसान क्रय केंद्रों की अपेक्षा बाजार में आढ़तियों के हाथों औने पौने दामों पर भी फसल बेचने को मजबूर हैं। हाला कि आढ़तियों के यहां उन्हें प्रति कुंतल 200-300 रुपये का नुकसान हो रहा है।
क्रय केंद्रों पर जहां 1925 रुपये प्रति कुंतल का मूल्य दिया जा रहा है। वहीं बाजार में 1400 से 1500 रुपये के बीच ही खरीद हो रही है। इसके बाद भी क्रय केंद्र में जहां पैसे का भुगतान बात में तो बाजार में तुरंत हो जा रहा है। इसलिए अब तक लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 51.73 प्रतिशत की ही खरीद हो पाई है। जिले में इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए 32900 एमटी का लक्ष्य दिया गया था। मंगलवार देर शाम तक जिले में 17020.217 एमटी की ही खरीद हो पाई है।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि खरीद एजेंसियों को लक्ष्य पूरा करने के लिए लगातार नोटिस भेजा जा रहा है। खरीद हो भी रही है। इसके साथ ही भुगतान भी किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही खरीद लक्ष्य के अनुसार व किसानों को शत प्रतिशत भुगतान हो जाएगा। वैसे भी इस वर्ष विगत वर्ष की तुलना में खरीद ज्यादा हुई है। इसके साथ ही विगत एक दो दिन में मंडी में खरीद की दर 1870 रुपये तक पहुंच गई है। इसके चलते भी किसान सरकारी खरीद केंद्र पर कम आ रहे हैं। -
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