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बौद्ध तपोस्थली में विभिन्न देशों के लोगों ने की पूजा

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गंध कुटि पर पूजा अर्चना करते श्रीलंकाई अनुयायी। - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती मौजूदा समय अनुयायियों से गुलजार है। यहां चल रहे विशेष वर्षावास पूजा में शामिल होने के लिए प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में विभिन्न देशों के अनुयायी पहुंच रहे हैं। उनके द्वारा आनंद बोधि व गंध कुटि पर विशेष वर्षावास पूजा कर विश्व शांति की कामना की जा रही है।
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इसी के क्रम में सोमवार को श्रीलंका के उपासकों का एक दल बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। दल में शामिल सदस्यों ने दीपालोक महाथेरों के नेतृत्व में आनंद बोधि पर विशेष वर्षावास पूजा की।
इस दौरान दीपालोक महाथेरो ने बताया कि गौतम बुद्ध का कहना है कि चार आर्य सत्य हैं। पहला यह कि दुख है। दूसरा यह कि दुख का कारण है। तीसरा यह कि दुख का निदान है। चौथा यह कि वह मार्ग है जिससे दुख का निदान होता है। गौतम बुद्ध के मतानुसार आष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है जिससे दुख का निदान होता है।
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आष्टांगिक मार्ग चूंकि ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्मांत, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के संदर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है, इसीलिए यह मध्यम मार्ग है। मध्यम मार्ग ज्ञान देने वाला है, शांति देने वाला है, निर्वाण देने वाला है, अत: कल्याणकारी है और जो कल्याणकारी है वही श्रेयस्कर है।
वहीं माता सुमिता महाथेरो ने बताया कि गौतम बुद्ध विश्वकल्याण के लिए मैत्री भावना पर बल देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे महावीर स्वामी ने मित्रता के प्रसार की बात कही थी। गौतम बुद्ध मानते हैं कि मैत्री के मोगरों की महक से ही संसार में सद्भाव का सौरभ फैल सकता है।
वह कहते हैं कि बैर से बैर कभी नहीं मिटता। अबैर व मैत्री से ही बैर मिटता है। मित्रता ही सनातन नियम है। इन पंक्तियों के लेखक का विनम्र मत है कि गौतम बुद्ध घृणा के घावों पर मोहब्बत का मरहम लगाते हैं। आज बेईमानी के बाजार में स्वार्थ के सिक्के चल रहे हैं। इस मौके पर संघानंद, आनंद सागर, नाग सागर, नाग ज्योति आदि बौद्ध भिक्षुओं सहित काफी तादाद में श्रीलंकाई बौद्ध उपासक मौजूद रहे।
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