संयुक्त जिला चिकित्सालय में हैंडपंप से निकल रहा दूषित जल।
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श्रावस्ती। बेहतर स्वास्थ्य के लिए संयुक्त जिला चिकित्सालय आने वाले मरीज व तीमारदार अस्पताल परिसर में ही दूषित जल पीकर अपनी सेहत बिगाड़ रहे हैं। यहां स्थापित वाटर कूलर खराब होने के कारण लोगों को हैंडपंप से निकलने वाले आयरन युक्त पानी को पीना पड़ रहा है।
जिले के पानी में आयरन की मात्रा काफी अधिक हैै। इसके लिए कुछ वर्ष पूर्व जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीण सहित नगरीय क्षेत्रों में लगे कम गहराई वाले हैंडपंपों के पानी की जांच कराई गई थी। इसमें आयरन की पुष्टि के बाद प्रशासन की ओर से कम गहराई वाले हैंडपंपों के पानी का प्रयोग पूर्णतया प्रतिबंधित कर दिया गया था। इतना ही नहीं जिला पंचायत राज अधिकारी की ओर से भी कम गहराई के हैंडपंपों पर क्रॉस का निशान भी लगवाया गया था।
इसके साथ लोगों को इन हैंडपंप के पानी का प्रयोग पीने में कदापि न करने को कहा गया था। वहीं इसके विपरीत संयुक्त जिला चिकित्सालय में लोगों को मजबूरन दूषित पानी पीना पड़ रहा है। अस्पताल में लगे ओवर हेड टैंक की जलापूर्ति अक्सर बाधित रहती है।
वहीं अस्पताल परिसर में लगा वाटर कूलर भी कई माह से खराब है। ऐसे में पेयजल के लिए मरीज व तीमारदारों को परिसर में लगे सरकारी हैंडपंपों का ही सहारा लेना पड़ रहा है। इसकी गहराई कम होने के कारण उससे दूषित जल निकल रहा है। ऐसे में बेहतर स्वास्थ्य के लिए संयुक्त जिला चिकित्सालय आने वाले मरीज व तीमारदार दूषित जल पीकर अपनी सेहत बिगाड़ रहे हैं।
अस्पताल में बेटे का इलाज कराने आए निब्बर ने बताया कि प्यास लगने पर परिसर में लगे हैंडपंप पर गया था। यहां हैंडपंप से जब उसने पानी भरा तो वह पीले रंग का निकला। दूषित पानी निकलने के चलते उसने बाहर से खरीदा। वहीं अस्पताल में भर्ती महिनका व संगीता ने बताया कि वह दो दिन से चिकित्सालय में इलाज करा रही हैं। यहां पर पीने के लिए दूषित पानी ही नसीब हो रहा है। यही हाल कुछ अन्य मरीज व तीमारदारों का भी रहा। जो हैंडपंप से दूषित पानी निकलने के चलते परेशान रहे।
सीएमओ डॉ. बीके सिंह ने कहा कि अस्पताल में लगे वाटर कूलर को तत्काल दुरुस्त कराया जाएगा। इसके साथ ही मरीज व तीमारदारों को स्वच्छ पेयजल मिले इसके लिए तत्काल व्यवस्था कराई जाएगी।