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गरीब बच्चों के लिए वरदान है पोषण अभियान..

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श्रावस्ती। जिले में बाल विवाह का प्रचलन पहले से ही चला आ रहा है। इससे बालिकाएं अज्ञानता वश कम उम्र में ही मां बन जाती हैं। परिपक्व न होने के कारण न तो वे अपना देखभाल कर पाती हैं और न ही नवजात का। इससे बच्चे कुपोषण के शिकार हो जाते हैं।
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यही कारण है कि जिले में अन्य जिलों की अपेक्षा मातृ एवं शिशु मृत्यु दर अधिक है। इसे गंभीरता से लेते हुए जिले में बाल विवाह निषेध कर दिया गया है। बाल विवाह की सूचना देने वाले को जिला प्रशासन द्वारा ईनाम देने के साथ ही प्रशंसा पत्र भी दिया जा रहा है।
ये बातें सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में पोषण अभियान की समीक्षा के दौरान डीएम टीके शिबु ने कहीं। उन्होंने कहा कि बाल विवाह की सूचना पर संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ वर-वधू के घर वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय विकास एजेंडा के केंद्र में पोषण को लाने के लिए पोषण अभियान की शुरुआत की गई है जो गरीब बच्चों के लिए वरदान साबित होगा।
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डीएम ने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए कई विभागों के कन्वर्जेंस हेतु मिशन है। इसका लक्ष्य स्टंटिंग, कम वजन के शिशु, एनीमिया की दर में कमी लाना है। इसके लिए भारत सरकार ने जन आंदोलन का प्रयास किया है।
पोषण संबंधी गतिविधियों के आयोजन में सामुदायिक भागीदारी व जन मानस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सितंबर 2018 को देश भर में राष्ट्रीय पोषण माह के रूप में मनाया गया। सितंबर में एनीमिया शिविरों, पोषण रैलियों, घर यात्राओं, पोषण मेला, हाट बाजार व युवा समूह की बैठकें आदि गतिविधियां आयोजित की गईं।
प्रदेश सरकार ने पोषण माह को सफल बनाने के लिए न्यूट्री गार्डन हेतु अदरक, हल्दी, सहजन, बेल, आंवला, नीम, तुलसी व पुदीना आदि के पौधे घरों में लगाने पर बल दिया है। न्यूट्री गार्डन को विकसित करने के लिए शासकीय परिसरों, सरकारी स्कूलों, आवासीय स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ग्राम पंचायत की भूमि को प्राथमिकता दी गई है। इसके साथ ही सरकार ने कुपोषित परिवार को निशुल्क गाय देने का आदेश जारी किया है।
पशुपालन विभाग को बाल विकास पुष्टाहार विभाग से समन्वय स्थापित कर इच्छुक कुपोषित परिवार के घरों में निराश्रित गोवंश उपलब्ध कराया जाए। कुपोषित परिवारों को गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रति माह में 900 रुपये दिए जाएंगे। बैठक में सभी संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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