कटरा (श्रावस्ती)। जिले को कुपोषण मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास जारी है। कहीं किसी स्तर पर कोई चूक न हो, इसके लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। इसी के क्रम में गुरुवार को ब्लॉक सभागार इकौना में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इसमें मौजूद प्रशिक्षकों ने क्षेत्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को आवश्यक जानकारी दी। कहा कि छह माह तक के बच्चों के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता महिलाओं को जागरूक करें।
ब्लॉक सभागार इकौना में सीडीपीओ श्यामू सिंह ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्ण मनोयोग के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने व उसका फील्ड में जाकर अनुपालन कराने की सलाह दी। प्रशिक्षक अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि शासन की ओर से प्रदेश में बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। सामान्य श्रेणी से कम वजन एवं अतिकुपोषित श्रेणी से अधिक वजन के बच्चे अल्पकुपोषित श्रेणी में आते हैं। जिनकी देखभाल की विशेष आवश्यकता होती है।
अच्छा पौष्टिक भोजन तथा स्वस्थ वातावरण में ऐसे बच्चे सामान्य श्रेणी में लाये जा सकते हैं। अगर बच्चों के भोजन व देखभाल में लापरवाही की गई तो वह अतिकुपोषित श्रेणी में जा सकते हैं। ऐसे बच्चों के लिए तत्काल डाक्टरी परीक्षण की आवश्यकता है। आंगनबाड़ी सुपरवाइजर मीरा ने कहा कि 0 से पांच वर्ष तक के बच्चों का वजन लेकर ही उनके कुपोषण का पता लगाया जा सकता है।
गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के इलाज की सुविधा जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केन्द्र पर निशुल्क उपलब्ध है। जहां बच्चों के इलाज के साथ-साथ देखभाल करने वाले व्यक्ति के रहने व खाने की भी निशुल्क व्यवस्था है। बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए यह भी आवश्यक है कि जन्म से 1 घंटे के अंदर मां का पहला दूध अनिवार्य रूप से पिलाया जाये।
6 माह तक के बच्चे के लिए मां का दूध ही संपूर्ण आहार है। कुपोषण से बचाने के लिए बच्चों की साफ सफाई, खान-पान व वजन वृद्धि की निगरानी अति आवश्यक है। गर्भवती माता के लिए पौष्टिक एवं संतुलित खान-पान, आयरन की गोलियां व नियमित स्वास्थ्य परीक्षण तथा वजन, ब्लड प्रेशर व हीमोग्लोबिन की जांच भी बहुत जरूरी है। इस प्रशिक्षण में बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी मौजूद रहीं।