फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों के लिए लाभदायक है स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति

विज्ञापन
विज्ञापन
श्रावस्ती। आज पानी का व्यवस्थित ढंग से उपयोग न करने पर भूजल स्तर में गिरावट आ रही है। ऐसी स्थिति में जल संसाधनों के सुव्यवस्थित एवं विवेकपूर्ण उपयोग के लिए सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं।
विज्ञापन

जल का सीमित उपयोग करके किसान अधिक क्षेत्र में फसलें बोकर अधिक उत्पादन ले सकते हैं। इसके लिए प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर (फव्वारा) पद्धति से फसलों की सिंचाई उपयोगी सिद्ध हो रही है।
ये बातें सोमवार को कृषि भवन में किसानों के साथ बैठक में जिला कृषि अधिकारी आरपी राणा ने कहीं। उन्होंने किसानों से कहा कि सिंचाई के लिए नहर, नलकूप, तालाब, कुआं, झील व नदियों आदि के पानी का उपयोग किया जाता है लेकिन सिंचाई की इन विधियों में स्प्रिंकलर पद्धति एक ऐसी पद्धति है जिसे अपनाकर जल प्रबंधन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।
विज्ञापन

कहा कि यह पद्धति सिंचाई की उन्नत और आधुनिक पद्धति है। इसमें सिंचाई क्यारियों में न करके पाइपों एवं नॉजल के माध्यम से वर्षा के रूप में की जाती है। फव्वारा पद्धति में प्लास्टिक अथवा एल्युमिनियम पाइपों को खेत में जाल की तरह बिछाकर ऊंचे-नीचे, रेतीले, पहाड़ी व पथरीली किसी भी प्रकार की जमीन पर सहजता से सिंचाई की जा सकती है।
उन्होंने बताया कि यह पद्धति जल संरक्षण के साथ ही मृदा क्षरण रोकने तथा भू-संरक्षण में भी सहायक होती है। इस विधि से सिंचाई करते समय जल बाहर नहीं जाता है। बोई गई फसल और भूमि की नमी बरकरार रहती है। इस विधि से 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। इससे किसानों की आय दोगुना हो सकती है।
विज्ञापन

आगे बताया कि किसान इस योजना से लाभ लेने के लिए कृषि एवं उद्यान विभाग से संपर्क करके लाभ उठा सकते हैं। बैठक में कई प्रगतिशील किसान मौजूद रहे।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें