जमुनहा (श्रावस्ती)। भारत नेपाल सीमा से सटे जमुनहा व तराई क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था सुधरने का नाम नहीं ले रही है। डीएम की सख्ती का क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में कोई असर नहीं दिख रहा है। यहां न तो विद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ रही है, और न ही बच्चों को मेन्यू के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण भोजन व शिक्षा ही मिल रही है। इसका खुलासा गुरुवार को बीईओ जमुनहा के औचक निरीक्षण में हुआ। जहां उन्हें कई खामियां देखने को मिली।
खंड शिक्षाधिकारी जमुनहा अखिलेश यादव ने गुरुवार को प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय परसोहना का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें किसी भी कक्षा में बोर्ड व मार्कर नहीं दिखा। इस पर नाराजगी जताते हुए उन्होंने सभी कक्षा में तीन दिन के अंदर बोर्ड की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।
प्राथमिक विद्यालय के चार अतिरिक्त कक्ष सहित उच्च प्राथमिक के 4 कक्ष व बरामदे में फर्श भी टूटी मिली। इस पर उन्होंने टाइल्स लगवाने को कहा। इस दौरान उन्होंने एमडीएम जांचा। निरीक्षण के दौरान एमडीएम चूल्हे पर बन रहा था।
ग्राम प्रधान ने बताया कि गैस खत्म हो गया था, जिसे गैस एजेंसी से मंगवाने के लिए भेजा है। यहां मेन्यू के अनुसार रोटी सब्जी बनना था। जिसके स्थान पर चावल सब्जी बना था। उच्च प्राथमिक विद्यालय में 98 के सापेक्ष 30 बच्चे उपस्थिति मिले। प्राथमिक विद्यालय में 155 के सापेक्ष 69 बच्चे ही मौजूद दिखे।
इस पर नाराजगी जताते हुए बीईओ ने मेन्यू के अनुसार भोजन बनवाने, 3 दिन में अभिभावकों से मिलकर 80 प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। ऐसा न होने पर शिक्षकों का वेेतन रोकने की चेतावनी दी।
निरीक्षण के दौरान प्रधान शिक्षक बाबादीन, सहायक शिक्षक रमेश कुमार यादव, शिक्षमित्र निर्मला सिंह व सन्तराम मौजूद रहे। वहीं प्राथमिक विद्यालय मनकौरा में 88 के सापेक्ष 42 बच्चे उपस्थिति मिले। यहां भी लकड़ी के चूल्हे पर एमडीएम में चावल सब्जी बना था। अधिकांश बच्चे ड्रेस में नहीं थे। इस पर शिक्षक को फटकार लगाते हुए व्यवस्था सुधारने का निर्देश दिया।