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धनतेरस व दीपावली के लिए बाजार तैयार

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श्रावस्ती। धनतेरस व दीपावली के लिए बाजार सज गए हैं। इलेक्ट्रानिक दुकान से लेकर कपड़ा व वाहन बाजार में अभी से रौनक दिखाई दे रही है। घरों को रोशन करने के लिए बाजारों में सजी रंग-बिरंगी झालर हर किसी को आकर्षित कर रही हैं। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए बाजार चायनीज झालरों से पटा हुआ है।
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दीपोत्सव पर इस बार बाजार में नए तरह की झालरें भी देखने को मिल रही है। इनकी मांग भी ग्राहकों में ज्यादा है। वहीं इस बार मिट्टी के दिए भी अपना रंग बिखेर रहे हैं। अभी से मिट्टी के दियों की मांग बढ़ी है। इसके चलते कुम्हारों के चाक तेज हो गए हैं।
इसके साथ ही दीपावली पर घर को सजाने के काम में आने वाली पारंपरिक चीजों को भी नया लुक देने की कोशिश की गई है। वहीं प्रकाश पर्व पर मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग भी सतर्क हो गया है। इस लिए विभागीय टीम बाजारों में छापामार कर खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए भर रही है।
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बाजार में इस बार पटाखे वाली झालर आई है, जो लोगों को काफी पसंद आ रही है। इस झालर में लाइट भी जलती है, पटाखे भी फूटते हैं। इसकी कीमत 1500 से 2000 तक है। वहीं नवरत्न झालर हर किसी को आकर्षित कर रही है। यह झालरें कई रंगों में रोशनी बिखेरती है।
लंबाई के हिसाब से झालरों का अलग अलग मूल्य है। इस बार ग्राहकों को म्यूजिकल ट्री काफी पसंद आ रहा है। करीब तीन से चार फुट लंबे इस म्यूजिकल ट्री को आप अपने कमरे में लगा सकते हैं। इसे एलईडी से सजाया गया है। जो कि हल्की रोशनी में काफी खूबसूरत लगता है। साथ ही इसमें लाइट म्यूजिक का भी विकल्प दिया गया है। यह 800 से 1000 रुपये में मिल रहा है।
धनतेरस, दीपावली व भैया दूज में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने के लिए जिले में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम छापा मारकर जांच कर रही है। बुधवार को एसडीएम भिनगा चंद्र मोहन गर्ग व खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार शर्मा ने भिनगा के नई बाजार में महेश मिष्ठान भंडार से छेना, संगम मिष्ठान भंडार से बेसन निर्मित मंसूर व छेना व शोभाराम किराना स्टोर से सरसों के तेल के नमूने भरे। वहीं संगम मिष्ठान भंडार में मिला 35 किलोग्राम छेना संदिग्ध लगने पर उसे नष्ट कराया। टीम का नेतृत्व मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अमित ने किया।
इलेक्ट्रानिक झालरों के साथ इस बार लोगों का रुझान मिट्टी के दिए की ओर भी है। इसीलिए मिट्टी के दिए ज्यादा बिक रहे हैं। भिनगा में दिया बनाने वाले मुस्तकीम कसगढ़ का कहना है कि ग्रामीण व नगरीय क्षेत्र से बराबर मांग आ रही है। प्रतिदिन लोग पिकप लाकर मिट्टी के दिए ले जा रहे हैं। इसी मांग को देखते हुए वह पूरे परिवार के साथ मिट्टी का दीपक बनाने में लगे हैं, जिससे मांग के सापेक्ष आपूर्ति हो सके। यही हाल अन्य जगह पर कुम्हारों का है, जो अपने परिवारीजनों के साथ दीपक बनाने में जुटे हैं।
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