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शिक्षित करने के साथ बेटियों को बनाएं स्वावलंबी

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जेतवन इंटर कालेज में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद पदाधिकारी व छात्राएं। - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। समाज का पोषण व संवर्धन करने वाली नारी अबला नहीं है। जिसने देवता व पैगंबर को जन्म दिया, आज इसी नारी को समाज में दोयम दर्जे का समझने की कुछ लोग भूल कर रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी और उन्हें सम्मान देना सभी का नैतिक कर्तव्य है। दूसरों की बहन बेटियों के साथ ऐसा कोई व्यवहार न करें जो आपको खुद की बहन बेटी के लिए पसंद न हो। जो माता-पिता अपनी बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें भी अपनी सोच बदलनी चाहिए।
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बेटियों को शिक्षा व संस्कार देने के साथ ही उन्हें स्वस्थ व स्वावलंबी बनाएं। यही बेटियां जिन्हें बोझ समझते हैं वही आपके बुढ़ापे का सहारा बनेंगी। सभी को अपनी सोच बदलकर बेटियों की शिक्षा और उनके भविष्य पर ध्यान देना चाहिए। यह बातें जेतवन इंटर कॉलेज कटरा में आयोजित अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद उप जिलाधिकारी इकौना ने कहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्रबंधक ने किया। इस दौरान विशिष्ट अतिथि के रूप में पुलिस क्षेत्राधिकारी इकौना मौजूद रहे।
नारी उस वृक्ष की भांति है जो विषम परिस्थितियों में भी तटस्थ रहते हुए राहगीरों को छाया प्रदान करती है। नारी की कोमलता एवं सहनशीलता को कई बार पुरुष ने उसकी निर्बलता मान लिया और इसलिए उसे अबला कहा। लेकिन वह अबला नहीं सबला है। पुरुष वर्ग शायद यह नहीं जानते की उसकी इसी कोमलता एवं सहनशीलता में ही मानव जीवन का अस्तित्व संभव है। - राजेश कुमार मिश्रा एसडीएम इकौना
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मां के सिवा संसार में कोई हस्ती नहीं है जो वात्सल्य और प्रेम से शिशु का लानन-पालन कर सके। संसार में चेतना के अविर्भाव का श्रेय नारी को ही जाता है। इसमें जरा भी संदेह नहीं है कि नारी ही वह शक्ति है जो समाज का पोषण से लेकर संवर्धन करती है। - तारकेश्वर पांडे, सीओ इकौना
वर्तमान समय में महिलाएं एक सुयोग्य गृहणी होने के साथ ही राजनीति, धर्म, कानून, न्याय सभी क्षेत्र में पुरुष की सहायक और प्रेरक भी हैं। आज की नारी जाग्रत व सक्रिय हो गयी है। वह अपने अंदर निहित शक्तियों को जानने लगी है। जिससे आधुनिक नारी का समाज में न केवल सम्मान अपितु प्रतिष्ठा भी बढ़ी है। व्यवसाय एवं व्यापार जैसे पुरुष एकाधिकार वाले क्षेत्र में जिस प्रकार महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है वो काबिले तारीफ है। - अशोक कुमार बौद्ध विद्यालय प्रबंधक
इंदिरा नूई, चंदा कोचर, चित्रा रामाकृष्णन, अनीता कपूर, अरुंधति भट्टाचार्या, आशु सुयश आदि महिलाएं दुनिया में नारी सम्मान का प्रतीक हैं। प्राचीनकाल में नारी की शक्ति की पहचान अपाला, घोषा जैसी विदुषी महिलाओं से होती है। यह सभी अपने ज्ञान के चलते ऋ षिकाओं के नाम से जानी गई। रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की गाथा भी सभी जानते हैं। आज महिलाएं सशक्त और संपन्न हैं।- पवन कुमार, प्राचार्य
स्वामी विवेकानंद के अनुसार नारी उतनी ही साहसी है जितना की पुरुष। आज के दौर में स्त्री किसी भी रूप में पुरुषों से कम नहीं। फिर भी समाज में भेड़िए के रूप में मौजूद लोग उन्हें कदम-कदम पर अपमानित करने की कुचेष्ठा में लगे रहते हैं। इनकी सुरक्षा के लिए डायल 112, 1090 व 1076 आदि मौजूद हैं। जिस पर सूचना देकर ऐसी गंदी सोच रखने वालों को सबक सिखाया जा सकता है। - आरती शाक्य, शिक्षिका
बालिकाओं को शिक्षा के साथ ही प्यार दुलार भी मिलना चाहिए। उनके खान पान पर भी विशेष ध्यान दें, ताकि वह स्वस्थ रहें। इससे उनका शरीरिक व मानसिक विकास तेजी से होगा। साथ ही उन्हें स्वावलंबी बनाने के लिए आत्मरक्षा का गुर भी सिखाएं जिससे आवश्यकता पड़ने पर वह अपनी आत्मरक्षा कर सकें। - अरविंद कुमार शिक्षक
विद्यालय शिक्षा का मंदिर है। यहां बच्चों का भविष्य निर्माण होता है। ऐसे में शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह छात्र छात्राओं में किसी प्रकार का भेदभाव न करें। उन्हें अपना बच्चा समझ कर बेहतर शिक्षा व संस्कार दें। - राधाकांत, शिक्षक
अमर उजाला पत्र ही नहीं मित्र भी है। जो बालिका सुरक्षा व महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयासरत है। हमारा सौभाग्य है कि हमें इससे जुड़ने का अवसर मिला। सभी को सलाह है कि अमर उजाला के अपराजिता मुहिम से जुड़ कर बेटियों और महिलाओं को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनें। - रोली पांडे
अमर उजाला के इस कार्यक्रम से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने बालिका सुरक्षा व शिक्षा के संबंध में संचालित योजनाओं के बारे में जानकारी दी, जो जीवन में कदम कदम पर काम आएगा। हमारा प्रयास होगा कि हम और लोगों तक यह जानकारी पहुंचा सकें। - स्वाती पांडे
बालिकाओं की शिक्षा व सुरक्षा को लेकर प्रत्येक माता पिता के दिल में कोई न कोई भय बना रहता है। लेकिन उन्हें डरने की जरूरत नहीं है। हमारी बेहतर शिक्षा व सुरक्षा के लिए सरकार व प्रशासन गंभीर है। हमें चाहिए कि हम इन हेल्प लाइन नंबरों को याद रखें। ताकि जरूरत पड़ने पर पुलिस से मदद मांग सकें। - अनीशा बानो
विद्यालयों में जिस प्रकार से शिक्षा के लिए समय सारिणी निर्धारित है। ठीक उसी प्रकार खेल कूद व आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए कक्षा का संचालन कराए जाने की जरूरत है। जिसमें छात्राओं को योगाभ्यास के साथ ही आत्मरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले तौर तरीके भी बताए जाएं। - आरती तिवारी
सिर्फ योजना व हेल्प लाइन नंबर बनाना पर्याप्त नहीं। बेटियों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद से भी तैयार होना होगा। इसके लिए जरूरी है कि वह सुरक्षा के तरीके सीखें और हेल्प लाइन नंबर जाने। अमर उजाला के अपराजिता एट दि रेट अमर उजाला डाट काम से जुड़ कर इस मुहिम को आगे बढ़ाने में सहयोगी बनें। - मोनी देवी
जिस देश में बेटियों को देवी की भांति पूजा जाता है। उसी देश में बेटियों पर अत्याचार भी कम नहीं हो रहे हैं। इन सबके पीछे कहीं न कहीं परिवार के संस्कार भी दोषी है। जिस प्रकार माता पिता बेटियों की चिंता करते हैं। ठीक उसी प्रकार यदि बेटों की गतिविधियों पर भी ध्यान रखें और उन्हें बेहतर संस्कार दें तो समस्या पर काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। - मनीषा टंडन
यातायात नियम व संकेतों की भांति ही हमें आत्मरक्षा के गुर भी सीखने चाहिए। जिस प्रकार हम हेल्प लाइन नंबर से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं। उससे ज्यादा सुरक्षा हमें खुद को स्वस्थ व प्रशिक्षित होकर मिल सकती है। स्कूल प्रशासन को चाहिए कि शुरूआत से ही छात्राओं को आत्मरक्षा का भी प्रशिक्षण दें। - मोहनी राव
अगर हम मानसिक मजबूत होने के साथ शारीरिक तौर पर भी स्वस्थ और ताकतवर रहें तो कोई हमारे करीब आने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा। इसके बावजूद यदि कोई कुचेष्ठा करें तो हम स्वयं से सबक सिखाएंगे ही। साथ ही हेल्प लाइन नंबर के सहारे उसकी करनी का सजा भी दिला सकेंगे। - निधी पांडे
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