कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को थाईलैंड से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से गंधकुटी व जेतवन में पूजन-अर्चन किया। जेतवन की परिक्रमा भी की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध ने प्राणी को हिंसा, चोरी, झूठ, नशा, मैथुन, रात्रि भोजन, माला पहनना, सुगंध धारण करना, मंच या बिछी भूमि पर सोने जैसे अष्टांग उपोसथ के नियम बताए। साथ ही उनका पालन करने का उपदेश भी दिया।
उन्होंने अष्टांग उपोसथ के नियम का पालन करने को दुख का अंत करने वाला मार्ग बताया। कहा कि चंद्रमा व सूर्य सुदर्शन हैं, जो प्रकाश फैलाते हैं और अंधकार का नाश करते हैं। वे आकाश की सभी दिशाओं को आलोकित करते हैं।
बताया कि मुक्ता, मणि, बिल्लौर, स्फटिक, शुद्ध कंचन, स्वर्ण, चंद्रमा का प्रकाश और सभी तारागण भी अष्टांग उपोसथ का पालन करने वाले के सोलहवें हिस्से के बराबर नहीं हैं। भगवान बुद्ध ने कहा था कि सदाचारी नारी और जो मनुष्य अष्टांग उपोसथ का पालन करते हैं, सुखदायक पुण्य कर्म करते हैं, वे अनिंदित रहकर स्वर्ग स्थान को प्राप्त होते हैं।