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पुरानी संस्कृति अपनाने से ही जीवन होगा सार्थक

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दो दिवसीय सेमिनार में मौजूद पदाधिकारी। - फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। महामाया राजकीय महाविद्यालय कटरा में रविवार को दो दवसीय सेमिनार का समापन हुआ। उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय प्रयागराज व महामाया राजकीय महाविद्यालय श्रावस्ती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सेमिनार के समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में एमएलके महाविद्यालय बलरामपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष संस्कृत मौजूद रहे।
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इस दौरान मुख्य अतिथि एमएलके महाविद्यालय बलरामपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष संस्कृत डॉ. कृपाराम त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति महान है। योग विज्ञान से कोरोना जैसी बीमारी से बचा जा सकता है। हमें अपनी पुरानी संस्कृति अपनानी होगी तभी हमारा जीवन सार्थक होगा। नवयुग कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय लखनऊ की सहायक आचार्य डॉ. वंदना द्विवेदी ने कहा कि हमारी सभी समस्या का निदान हमारे गीता ज्ञान से है। मानव की समस्याओं का निदान गीता ज्ञान से संभव है। आचार्य नरेंद्र देव किसान स्नातकोत्तर महाविद्यालय बभनान गोंडा के संस्कृत आचार्य डॉ. अखिलेश्वर प्रसाद शुक्ल ने कहा कि प्राकृतिक औषधि का उपयोग करके कोरोना से बचा जा सकता है। गर्म जल का इस्तेमाल कर तथा तुलसी का काढ़ा बनाकर पीने से विभिन्न बीमारियों से मुक्ति मिलती है।
राजकीय महाविद्यालय डुमरियागंज के आचार्य डॉ. चंद्रकांत मिश्र ने कहा कि यज्ञ ही सबसे बड़ा श्रेष्ठ कर्म है। हमारे वेदों में कहा गया है कि हिंसा मत करो इसीलिए हमें अपने पुरानी संस्कृति को याद करना होगा तभी हमारा जीवन सुव्यवस्थित सफल होगा। कार्यक्रम को विद्यालय के प्राचार्य डॉ. धर्मेन्द्र गुप्त, डॉ. आशुतोष मिश्र, प्रोफेसर एस एन वर्मा, प्रोफेसर उपेंद्र कुमार सोनी, प्रोफेसर दिलीप कुमार ने भी संबोधित किया। इस मौके पर शिक्षक दिवाकर पांडे, गिरीश प्रसाद मिश्रा व विद्यालय के छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
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