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Shravasti News: डेढ़ माह से कटा पड़ा भिनगा-मल्हीपुर मार्ग

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मधवापुर घाट पर पानी व कीचड़ के बीच से होकर आते जाते लोग। - फोटो : मधवापुर घाट पर पानी व कीचड़ के बीच से होकर आते जाते लोग।
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श्रावस्ती/तुलसीपुर। जिले के हुक्मरानों की लापरवाही के कारण जमुनहा तहसील के लाखों लोगों को मुसीबत झेलनी पड़ रही है। राप्ती की बाढ़ में कटे भिनगा-मल्हीपुर मुख्य मार्ग की डेढ़ माह बाद भी सुधि नहीं ली गई है। इससे वाहन चालकों को जिला मुख्यालय पहुंचने के लिए 37 किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। इस अनदेखी से ग्रामीणों में शासन-प्रशासन के प्रति आक्रोश पनप रहा है।
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नेपाल के पहाड़ों पर हुई झमाझम बारिश से अगस्त के पहले सप्ताह में अचानक राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। राप्ती की लहरों का वेग भिनगा-मल्हीपुर मुख्य मार्ग झेल नहीं सका और वीरपुर के पास कुछ घंटे में ही कट गया। इसके बाद से भिनगा-मल्हीपुर मार्ग पर आवागमन बाधित है और जमुनहा व मल्हीपुर के लाखाें लोगों को जिला मुख्यालय जाने के लिए 37 किमी का लंबा सफर तय कर बदला चौराहा से बरदेहरा मोड़ होते हुए भिनगा पहुंचना पड़ रहा है।

इनसेट-
बाइक सवार जोखिम में डाल रहे जान
राप्ती की बाढ़ में मल्हीपुर-भिनगा मुख्य मार्ग 30 मीटर से अधिक कट गया था और लगभग 500 मीटर तक क्षतिग्रस्त हुआ है। बावजूद इसके बाइक सवार कटान स्थल में भरे पानी व कीचड़ के बीच से गुजर रहे हैं, ऐसे में किसी भी समय हादसा हो सकता हैं। वहीं, पैदल राहगीर भी पानी व कीचड़ के बीच से कटान स्थल पार करते हैं। राहगीर मल्हीपुर से कटान स्थल तक ऑटो व ई-रिक्शा से पहुंचते हैं और कटान स्थल पार कर दूसरे छोर पर खड़े ऑटो से भिनगा तक का सफर तय करते हैं।
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इनसेट-
चोटिल हो रहे लोग
डेढ़ महीने से सड़क कटी हुई है, लेकिन किसी भी जिम्मेदार ने इसे सही करवाने की पहल नहीं की है। बाइक व पैदल राहगीर जान जोखिम में डालकर कटान को पार करते हैं और प्रतिदिन दर्जनों लोग पानी व कीचड़ में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। प्रशासन को जल्द से जल्द सड़क बनवा देनी चाहिए।
विपिन यादव, शिकारी चौड़ा
फोटो-20
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श्रद्धालुओं को परेशानी
बंदरहा बाबा मंदिर प्राचीन मंदिर है और यहां से लाखों लोगों की आस्था जुड़ी है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग मंदिर पर दर्शन-पूजन के लिए आते हैं, लेकिन सड़क कटी होने से श्रद्धालुओं को समस्या हो रही है। श्रद्धालु पानी के बीच से मंदिर आने को कतराते हैं। वहीं, राप्ती की कटान से मंदिर के कटने का भी खतरा है। प्रशासन को मदद करनी चाहिए।
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बाबा चेतनदास, स्थानधारी बंदरहा बाबा कुट्टी
फोटो-21
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