श्रावस्ती। केंद्र व प्रदेश सरकार प्राचीन चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है। सरकार लोगों को योग से निरोग रखने के साथ ही आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सा पद्धति अपनाने के लिए जागरूक कर रही है। वहीं इसके विपरीत जिले में आयुष मिशन सोसाइटी की ओर से संचालित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालयों में चिकित्सकों व दवाओं का टोटा बना हुआ है। जिले के 14 आयुर्वेद अस्पतालों में सिर्फ आठ चिकित्सकों की तैनाती है। छह चिकित्सालयों में आने वाले मरीजों को फार्मासिस्ट कुछ दवाएं देकर काम चला रहे है।
जिले के चौदह आयुर्वेदिक चिकित्सालयों के संचालन के लिए मात्र एक चिकित्सक की ही तैनाती थी। विगत सप्ताह शासन की ओर से सात नए चिकित्सकों को तैनात किया गया है। वहीं एक यूनानी चिकित्सालय के संचालन के लिए एक चिकित्सक की तैनाती है। इतना ही नहीं जिले में आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी की जिम्मेदारी भी बहराइच में तैनात चिकित्सक के सहारे है। जो सिर्फ मीटिंग करने के लिए कलेक्ट्रेट तक आ रहे हैं। ऐसे में जिले के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों को भी इलाज की दरकार है।
चिकित्सकों की कमी के कारण विभाग की ओर से फार्मेसिस्ट के सहारे ही अस्पतालों का संचालन कराया जा रहा है। जिले में विगत दस वर्षों से किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सालय में च्यवनप्राश, शक्ति वर्धक टानिक, अश्वगंधारिष्ट, च्यवन प्रभावटी, अग्रितुंडी वटी, चितमारि गुटका, लीवर सहित साधारण बीमारियों की दवाएं नहीं आ रही है। हर्र बहेर व आंवला विगत कई माह से अस्पतालों से नदारद है।
अस्पताल में इस समय शंखभस्म, खड़विंद तेल, शु स्फाटिका, श्वेत परपटी, टकड़ भस्म, कैसोर गुग्गुल, चंदामृत रस, त्रिभुवन कीर्तिरस, गौतंतीभस्म, शु कुपीलू, कफ केटरस, मंडूर भस्म, रजा पर्वतनी वटी, प्रभाकर वटी, आनंद भैरव रस, अरेग्य वर्धनी, संजीवनी वटी, तिपोदशांक, रसमाणिक, असफार्टका ही मौजूद हैं। ऐसे में या तो मरीजों को बाहर से दवाएं लेनी पड़ रही है, या फिर लोग इस चिकित्सा पद्धति से मुंह फेर अंग्रेजी दवाओं का सहारा ले रहे हैं।
फार्मेसिस्ट के सहारे महकमा
जिले में आयुर्वेद व यूनानी चिकित्सालयों में 15 चिकित्सक, 15 फार्मेसिस्ट व तीस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष नौ चिकित्सक, 15 फार्मेसिस्ट व दस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही तैनात हैं। वहीं जिले में आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी की तैनाती न होने के कारण बहराइच के जिला आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सक को प्रभारी बनाया गया है।
यह दवाएं नदारद
मुख्यालय भिनगा के सर्राफ गली में किराए के भवन में संचालित राजकीय आयुर्वेद चिकित्सालय में शरद ऋतु में जोड़ों आदि के दर्द से निजात के लिए कोई भी तेल मौजूद नहीं है। अस्पताल में अरंड तेल, महानारायण तेल, नासावलेह, लवंगादिवटी, अर्जुनारिष्ट, लौहासव, कुटज धनवटी, लवण भाष्करचूर्ण, चित्रकादि गुटिका, अर्जुनत्वक चूर्ण, सिरसूत्र हस्लेह, पंचगुण तेल आदि नदारद है।
जिले में सात चिकित्सकों की विगत सप्ताह तैनाती की गई है। साथ ही सभी अस्पतालों में पर्याप्त दवाएं मौजूद हैं। यदि कहीं कमी है तो वहां तत्काल दवाएं भेजी जाएंगी। रही बात च्यवनप्राश आदि की तो इसकी सप्लाई शासन से ही नहीं हो रही। मैं स्वयं जाकर अस्पतालों की जांच करूंगा। जो भी कमियां हैं उसे दूर किया जाएगा। - डॉ. राजीव कुमार, प्रभारी आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्साधिकारी