श्रावस्ती। जिले में दिन प्रतिदिन जलस्तर कम हो रहा है। इसमें सुधार के लिए भूजल संचयन तथा उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि के लिए किसानों को चाहिए कि वह ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति के माध्यम से सिंचाई करें। किसान पौधों को सीधे विभिन्न प्रकार के संयंत्रों, पाइप, तकनीकों के माध्यम से जल मुहैया कराएं। इससे जल एवं ऊर्जा की बचत होगी।
यह बातें मंगलवार को जिलाधिकारी टीके शिबु ने किसानों के नाम जारी अपील में कहीं। डीएम ने कहा कि प्रदेश में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजनांतर्गत ड्रॉप मोर क्रॉप के तहत ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई को किसानों के लिए उपयोगी बनाया जा रहा है। इस पद्धति को अपनाते हुए किसान कम पानी से अधिक उपज प्राप्त करते हुए अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ड्रॉप मोर क्रॉप (माइक्रोइरीगेशन) का जिले में संचालन हो रहा है। अतिदोहित क्रिटिकल एवं सेमीक्रिटिकल विकास खंडों में प्राथमिकता पर इसे लागू करते हुए क्रियान्वयन किया जा रहा है। फसलों के उत्पादन में कृषक माइक्रोइरीगेशन अपनाकर कम जल से अधिक फसलों का उत्पादन कर सकते हैं।
इस पद्धति से केवल पौधों में पानी देने से पानी की बचत एवं पौधों को पानी देने के लिए मेड़ व नालियां बनाने की जरूरत नहीं पड़ती है। इस तरह फसल के पौधों को सीधे पानी मिलने से फसल की गुणवत्ता एवं पैदावार में वृद्धि होती है। जड़ों में पानी देने से खर-पतवार पर प्रभावी नियंत्रण, उर्वरक की बचत, ऊंची नीची भूमि में पौधों की सिंचाई भली-भांति होती है।
पौधों में लगने वाले कीट व अन्य रोगों की उचित रोकथाम होती है। सिंचाई कार्य में कम समय में सिंचाई होती है। ड्रिप/ स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति किसानों के लिए बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो रही है। ड्रिप/स्प्रिंकलर सिंचाई पद्धति अपनाने के लिए कृषकों पर पड़ रहे व्यय भार को कम करने के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लघु एवं सीमांत कृषकों को इकाई लागत के सापेक्ष 90 प्रतिशत एवं अन्य कृषकों को 80 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। ऐसे में किसान इस सिंचाई पद्धति को अपना कर लाभान्वित हों।