श्रावस्ती। डिजिटल इंडिया का असर तराई के पिछड़े जिले में भी देखने को मिल रहा है। प्रदेश के दस जिलों में शुरू हुई ई पीएचसी में जिले के 5809 मरीजों का इलाज कर श्रावस्ती पांचवें स्थान पर रहा। चंदौली प्रदेश में अव्वल रहा।
सुदूर क्षेत्रों में रहने वालों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने के लिए ई पीएचसी का संचालन प्रारंभ किया गया था। जमुनहा के नासिरगंज स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 16 अक्तूबर 2019 को ई-पीएचसी का संचालन प्रारंभ कराया गया था। तब से अब तक इस ई-पीएचसी पर 5809 मरीजों का उपचार कराकर उन्हें स्वास्थ्य किया गया है।
पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत श्रावस्ती समेत यूपी के दस जिलों में ई-पीएचसी की शुरुआत की गई थी। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. उदयनाथ ने बताया कि इस ई-पीएचसी का संचालन स्वास्थ्य विभाग और डाक ऑनलाइन संस्था के सहयोग से किया जा रहा है। यहां पर आकस्मिक उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है।
यहां पर डोको लाइन कंपनी कई ओर से 64 प्रकार की दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। यह दवाएं मरीजों को निशुल्क दी जाती हैं। यहां पर आने वाले मरीजों को अपने साथ आधार कार्ड, ड्राइविंग लाईसेंस, पैन कार्ड अथवा राशन कार्ड में से कोई पहचान पत्र लाना होता है। आवश्यकता होने पर यहां का स्टाफ हैदराबाद स्थित डोको लाइन कंपनी के मुख्यालय के चिकित्सकों से ऑनलाइन परामर्श लेकर मरीजों को दवाएं देता है। गंभीर मरीजों को उच्च स्वास्थ्य केंद्र के लिए रेफर कर किया जाता है।
यह है ई पीएचसी
ई-पीएचसी यानी इलेक्ट्रानिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जो प्रदेश में पीपीपी मॉडल पर विकसित किए गए हैं। ई पीएचसी पर नर्स, लैब टेकनीशियन और फार्ममासिस्ट की तैनाती की गई हैं। नर्स व फर्मासिस्ट आए मरीज का पंजीकरण कर उसकी पूरी जानकारी अपने कमांड सेंटर को भेजते हैं।
इसके बाद वीडियो कालिंग के जरिये तत्काल एमबीबीएस डॉक्टर परामर्श देते हैं। खास बात यह कि मरीज की पैथोलॉजी जांच रिपोर्ट डॉक्टर और मरीज दोनों के ईमेल पर एक साथ आती है। इससे डॉक्टर को दवा बताना बहुत आसान हो जाता है। ई पीएचसी पर मरीज को परामर्श और दवा की निशुल्क सुविधा दी जाती है।
यह होती हैं जांचें
ई पीएचसी पर ईसीजी, ईएसआर, एचआईवी, हीमोग्लोबिन, ब्लड प्रेशर, शुगर, डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया, टाइफाइड, कालाजार, बलगम, विडाल टेस्ट, टोटल डब्ल्यूबीसी, बीडीआरएल काउंट, यूरिन ब्राइल साल्ट, यूरिन डिपॉजिट, यूरिन पीएच, यूरिन इस्पोसिफिक ग्रेविटी, यूरिन शुगर, आरपीआर व गर्भवती की सेहत की जांच की जाती है।
इन जिलों में हो रहा संचालन
चंदौली के कमलापुर में 8348 लोगों का इलाज किया गया है। बहराइच के लौखाई में 6773, फतेहपुर के ललौली में 6681, वाराणसी के सारनाथ में 6242, श्रावस्ती के नासिरगंज में 5809, बलरामपुर के भगनी में 4555, सिद्धार्थनगर के मधौपुर कल्लन में 3515, चित्रकूट के ऊंचडीह में 3164, गोरखपुर के रामपुर में 2872 तथा सोनभद्र के सतबहनी में 28936 लोगों का इलाज किया गया है।