जेतवन परिसर में आयोजित सभा के दौरान मौजूद अनुयायी।
कटरा। बुद्ध की तपोस्थली में शनिवार को श्रीलंका के 60 बौद्ध अनुयायियों ने गंधकुटी पर अपने रीति-रिवाज के अनुसार वर्षावास पूजा की। इस अवसर पर बौद्ध भिक्षुणी माता सुमेधा थेरो ने अनुयायियों को बौद्ध दर्शन के सिद्धांतों के बारे में उपदेश दिया।
सभा में माता सुमेधा थेरो ने कहा, बौद्ध दर्शन के दो प्रमुख सिद्धांत हैं। पहला यह कि ज्ञान संसार से परे किसी शक्ति को जानना नहीं, बल्कि संसार में होने वाले दुखों के निवारण के उपाय खोजकर उनका पालन करना है। उन्होंने बताया कि अध्यात्म दुख को समाप्त नहीं करता, बल्कि यह समझाता है कि संसार की हर वस्तु परिवर्तनशील है। उन्होंने बौद्ध दर्शन के दूसरे सिद्धांत मध्यम मार्ग पर प्रकाश डालते हुए कहा, जीवन में किसी भी वस्तु, गुण या प्रवृत्ति की अधिकता या कमी नहीं होनी चाहिए। संतुलित जीवन ही मध्यम मार्ग है।