इकौना / जमुनहा (श्रावस्ती)। राप्ती नदी का जलस्तर घटने के बाद भी कछार में लोगों की दुश्वारियां बरकरार है। वहीं इकौना क्षेत्र में राप्ती की बाढ़ से बचे गांव को अब कुआनों डुबो रही है। वहीं जिन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी निकल चुका है। वहां निकलने वाली धूप से घर व दीवारें गिर रही हैं। वहीं किसानों के सामने अब घरों में रखे अन्न को भी सुरक्षित करने का संकट उत्पन्न हो गया है।
खतरे के निशान से ऊपर बहने वाली राप्ती नदी बैराज पर शुक्रवार को घट कर 127.60 मीटर पर पहुंच गई है। जो खतरे के निशान से 10 सेंटीमीटर नीचे है। ऐसे में जमुनहा व हरिहरपुररानी सहित गिलौला क्षेत्र के ज्यादातर गांवों से बाढ़ का पानी निकल चुका है। हालांकि कई गांवों में अब भी जलभराव की समस्या उत्पन्न है। बाढ़ खत्म होते ही राप्ती की तबाही के निशान भी दिखने लगे हैं। गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग हों या मुख्य मार्ग सभी क्षतिग्रस्त हैं। कई क्षेत्रों में बने पुल के अप्रोच व पुलिया भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इससे आवागमन की समस्या उत्पन्न है। इससे भी खराब हाल बाढ़ प्रभावित गांवों का है। जहां घरों में रखे अनाज भी बाढ़ की भेंट चढ़ गए। वहीं इकौना क्षेत्र के जो गांव राप्ती की बाढ़ की विभीषिका से बच गए हैं उन्हें अब गोंडा सीमा में बहने वाली कुआनों नदी डुबो रही है।
कुआनों के कहर से कई मकान हुए धराशाई, मार्ग क्षतिग्रस्त
इकौना सहित जिले के के करीब 42 गांव अब भी बाढ़ की चपेट में हैं। जहां लोग बाढ़ का पानी निकलने का इंतजार कर रहे हैं। ताकि जिंदगी पुन: पटरी पर लौट सके। वहीं अब तक बाढ़ के प्रकोप से बचे कोटवा, नरपतपुर, विशुनापुर, शिवपुर बनकट सहित अन्य गांवों में गोंडा जिले की सीमा पर बहने वाली कुआनो नदी कहर बरपाने लगी है। नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण इन गांवों में जहां फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गई हैं। वहीं नरपतपुर निवासी रामचंद्र की पक्की दीवार गिरने से उसकी 7 वर्षीय पुत्री का पैर टूट गया। वहीं चक्रभंडार गांव में पारस नाथ वर्मा, सुबेदार वर्मा, गुनगे, राजितराम व प्रहलाद मौर्य के मकान धराशाई हो गए। जेतवन जाने वाला मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। म्यांमार मंदिर की करीब 25 फीट व कोरिया मंदिर की करीब 40 फिट बाउंड्रीवाल बाढ़ में गिर गई।
निकला बाढ़ का पानी तो याद आई गृहस्थी
राप्ती के बाढ़ का पानी निकलने के बाद जमुनहा के बेलरी, गंगाभगड़, चमारनपुर, मुरावन पुरवा, गजोबरी, मोहनपुर, भरथा, बरंगा, घाटेपुरवा, सलारू पुरवा, हसनापुर, वीरपुर, लौकिहा, पिपरहवा, वीरगंज, गणेशपुर, शिकारी चौड़ा, बिचई पुरवा, गुरवा, गुरुदत्तपुरवा, हरिहरपुर, महाराजनगर, जोगिया, नौसहरा, बहोरवा, लक्ष्मणपुर, सेमरहानिया, पोंडला, पोंडली, भगवानपुर व हरिहरपुररानी के असरफा बाजार सहित इकौना के दहावर कला व कोटवा आदि गांव में अब भी जलभराव है। यहां लोगों के घरों में रखा अनाज पानी में डूब जाने के कारण बर्बाद हो गया है। जिसे ग्रामीण घरों से निकाल कर सड़क व ऊंचे स्थानों पर सुखा रहे हैं।
राप्ती की नई धाराएं प्रशासन को कर रहीं चैलेंज
बाढ़ के दौरान राप्ती की कई धाराएं नई बनीं। इसमें से लक्ष्मननगर की ओर राप्ती का रुख आने वाले समय में प्रशासन के लिए एक नया चैलेंज बन कर उभरेगा। नदी लगातार लक्ष्मननगर पुल व फोरलेन को ठोकर मार रही है। इस पूरी बाढ़ में इस स्थान को बचाने के लिए प्रशासन को अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ी। विशेषज्ञों की मानें तो यदि आने वाले समय में भी इसी तरह की आपदा आई तो इस स्थान को राप्ती अपना नया रास्ता बना सकती है।
तटबंध ने बचाया नहीं तो होती ज्यादा तबाही
परसा तिलकपुर तटबंध ने इस बार लोगों को बड़ी राहत दी है। वर्ष 2014 में आई बाढ़ का फ्लड लेबिल 130.15 मीटर था। उस समय 190 गांव प्रभावित हुए थे। लेकिन इस वर्ष वाटर लेबिल 130 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बावजूद मात्र 114 गांव ही प्रभावित हुए। यह तटबंध के कारण ही हुआ।
आपदा वालेंटियर बने देवदूत
बाढ़ से पहले आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने इस बार 430 आपदा मित्रों की फौज जिले में खड़ी की थी। इसमें 168 संवेदनशील गांव शामिल थे। जहां प्रतिवर्ष बाढ़ आती है। ऐसे गांवों में दो से तीन युवाओं को लखनऊ भेज कर प्रशिक्षण दिलाया गया था। इसके साथ ही इन्हें लाइफ जैकेट सहित अन्य उपकरण दिए गए थे। आपदा के समय इन युवाओं ने एक सुरक्षा बेडे़ की तरह काम किया। जिसके चलते एनडीआरएफ की कम संख्या के बावजूद जिले में ज्यादा राहत कार्य हुआ।