श्रावस्ती। बाढ़ के दौरान 50893 हेक्टेअर धान की फसल बर्बाद हो गई। यह आंकड़ा अभी प्राथमिक ही है। नुकसान का दायरा और ज्यादा हो सकता है। सबसे ज्यादा नुकसान इकौना क्षेत्र में तो सबसे कम नुकसान जमुनहा क्षेत्र में हुआ। बाढ़ की तबाही के बाद अब हुए नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है। सबसे ज्यादा हानि कृषि क्षेत्र में हुआ है। जहां फसलें कुछ क्षेत्रों में तो पूरी तरह से तबाह हो गई हैं। वहीं कुछ इलाकों में आंशिक नुकसान हुआ है। लेकिन कुल मिलाकर नुकसान का दायरा 51 फीसदी से अधिक है। यदि सरकारी आंकड़ों की मानें तो जिले में 93,151 हेक्टेअर में खेती बाड़ी की जाती है।
इसमें से 74,188 हेक्टेअर भूमि में धान, 15100 हेक्टेअर भूमि में मक्का ज्वार व बाजरा, 3095 हेक्टेअर में उर्द, अरहर व मूंग, 730 हेक्टेअर में मूंगफली व सोयाबीन तथा 510 हेक्टेअर भूमि में ढैंचा व जूट की खेती की गई थी। बाढ़ के बाद हुए नुकसान में अभी प्रथम चरण में केवल धान में हुए नुकसान का नजरी सर्वे कर्मचारियों द्वारा किया गया है। इस सर्वे में इकौना विकास खंड में धान की फसल को 85 फीसदी, गिलौला में 56, जमुनहा में 51, हरिहरपुररानी में 73 तो सिरसिया में 78 फीसदी का नुकसान हुआ है। औसतन जिले में 68.6 प्रतिशत धान की पैदावार समाप्त हो गई। जोकि लगभग 50,893 हेक्टेअर में बोई गई थी। वहीं दूसरी फसलों में इस औसत से ज्यादा नुकसान हुआ है। खास तौर से दलहनी फसल पूरी तरह से समाप्त हो चुकी है।
अब मुआवजे को लेकर करना होगा संघर्ष
नुकसान वाले इलाकों में आपदा प्रबंधन व प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना दोनों से किसानों को लाभ मिलेगा। जिले में इस वर्ष 23,995 किसान ही इस बीमा योजना के तहत बीमित हैं। जबकि प्रभावित किसानों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। ऐसे में जिन किसानों का शत-प्रतिशत नुकसान हुआ है उन्हें 65,999 रुपये प्रति हेक्टेअर के साथ ही बाढ़ आपदा के तहत 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर अतिरिक्त दिया जाएगा। लेकिन यदि किसान बीमित नहीं है तो उसे केवल 18 हजार रुपये प्रति हेक्टेअर का मुआवजा मिलेगा। यह उत्पादकता का मात्र पांच फीसदी के बराबर होगा।
इकौना में अधिक तो जमुनहा में सबसे कम नुकसान
बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र में कितना नुकसान हुआ है। इसका अभी पूर्ण आंकड़ा संकलित नहीं हुआ है। ब्लॉकवार नुकसान के प्रथम दृष्टया आंकड़े आए हैं। जिसके अनुसार सबसे अधिक इकौना तो सबसे कम जमुनहा में नुकसान हुआ है। -डॉ. अवधेश कुमार यादव, जिला कृषि अधिकारी