गिलौला (श्रावस्ती)। प्रदेश सरकार की ओर से सभी छुट्टा मवेशियों को गोआश्रय स्थलों में संरक्षित कराने का दावा किया जा रहा है। जबकि हकीकत एकदम जुदा है। अधिकतर छुट्टा मवेशी मुख्य मार्गों व खेतों में डेरा जमाए हुए हैं। जिनसे फसल को बचाने के लिए किसान परेशान हैं।जिले में स्थापित गोआश्रय स्थल में रहने वाले शत-प्रतिशत गोवंशों की ईयर टैगिंग व जियो ट्रैकिंग कराने के लिए बैठकों में डीएम की ओर से लगातार निर्देशित किया जा रहा है। जिसका जिले में अनुपालन नहीं हो रहा है। अधिकारियों के निरीक्षण की पूर्व सूचना पर जिम्मेदार आसपास घूम रहे गोवंशों को आश्रय स्थलों में लाकर संरक्षित कर देते हैं। जिनकी संख्या के आधार पर उनके चारा-पानी के नाम पर सरकारी धन निकाला जा रहा है।
अधिकारियों के जाने के बाद गोआश्रय स्थलों के जिम्मेदार गोवंशों को आश्रय स्थलों से बाहर देते हैं। जो किसानों की फसलों पर कहर बरपाते हैं। जिनसे सुरक्षा के लिए किसान दिन-रात खेत की रखवाली कर रहे हैं। इतना ही नहीं मुख्य मार्गों में झुंड में मौजूद गोवंश दुर्घटना का कारण बन गए हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने एक अप्रैल से सभी गोवंशों को आश्रय स्थलों में संरक्षित कराने का दावा किया है। ऐसे में किसानों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री के आदेश का अनुपालन हो तो छुट्टा जानवरों से निजात मिल सकेगी।