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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई ग्रामीण पाइप पेयजल योजना

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अमवा के इटवरिया में बनी पानी की टंकी। - फोटो : SRAWASTI
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श्रावस्ती। ग्रामीण क्षेत्र के भूजल में आर्सेनिक की मात्रा अधिक है। इसके चलते कई जगहों पर पानी पीने योग्य नहीं है। इस समस्या से लोगों को राहत दिलाने के लिए कई ग्राम पंचायतों में पाइप लाइन पेयजल योजना की शुरूआत की गई थी। करोड़ों रुपये खर्च कर गांव में पानी की टंकी का निर्माण कराया गया।
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इसके साथ ही जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन डाली गई, लेकिन इन सब में मानकों की जमकर अनदेखी की गई। इससे किसी गांव में जलापूर्ति के परीक्षण के दौरान पाइप लाइन फट गई तो कई जगह पर पानी की टंकी ही रिसने लगी। इससे इस योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल सका। यह हाल एक दो नहीं बल्कि 13 ग्राम पंचायतों का है।
इन गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए शुरू की गई योजना के परवान नहीं चढ़ने से लोगों में नाराजगी भी है। जमुनहा व गिलौला विकास खंड क्षेत्र के भूजल की स्थित सबसे ज्यादा खराब है। इस लिए जमुनहा में पेयजल आपूर्ति के लिए ज्यादा परियोजनाएं शुरू की गई थी, लेकिन इनमें एक भी सफल नहीं हो सकी।
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महरुमूर्तिहा से जुड़े कई गांवों में नहीं बिछी पाइप
महरुमूर्तिहा में 2013-14 में पेयजल पाइप लाइन योजना के तहत वाटर हैड टैंक के साथ नलकूप स्थापना व पाइप लाइन बिछाने का काम कराया जाना था। इस परियोजना से मुर्तिहा, महरु, जमुनही, बृजवासी पुरवा, बंजारन पुरवा सहित आठ पंचायतों के लगभग 8500 ग्रामीणों को लाभ मिलना था। अधिकारियों की लापरवाही से परियोजना में शामिल बनकटी, गुजारन पुरवा, दर्जी पुरवा में आज तक पाइप लाइन नहीं बिछ सकी। यही नहीं जिन गांवों में जलापूर्ति के लिए पाइप लाइन डाली भी गई वहां परीक्षण के दौरान यह जगह जगह से फट गई। इससे योजना को बंद करना पड़ा।
ट्रायल में फटी सीमेंटेड पाइप, खेतों में बहा पानी
फतेहपुर बनगई में पेयजल पाइप लाइन योजना के तहत वाटर हैड टैंक व जलापूर्ति प्रणाली स्थापित की गई थी। इस परियोजना से बनगई गांव, बनगई बाजार, फतेहपुर, बासगड़ी, मंतुरी, जब्दी, भयापुरवा, राजामहल पुरवा, कटहल लाइन, गड़रियनपुरवा को पानी आपूर्ति की जानी थी। इसके लिए जमीन में सीमेंटेड पाइप बिछाई गई थी, लेकिन पहले ही ट्रायल में सीमेंटेड पाइप भी फट गई। इसके चलते पूरा पानी खेतों में बह गया। इस परियोजना से पेयजल तो नहीं खेतों की सिंचाई जरूर होने लगी। बाद में इसका नलकूप बंद कर दिया गया।
परीक्षण में ही टंकी से रिसने लगा पानी
ब्लॉक मुख्यालय वीरगंज के निकट पटवा में पेयजल पाइप लाइन योजना के तहत वाटर हैड टैंक का निर्माण 2017-18 में हुआ था। परियोजना पूरी होने पर इसके ट्रायल के लिए टैंक में पानी भरा ही गया था कि टंकी के निचली सतह में चारों तरफ रिसाव होने लगा। इसके चलते टंकी को तत्काल खली कर दिया गया। इसके बाद इसको बनवाने वाले अधिकारी व ठेकेदार मौके से फरार हो गए। इस परियोजना से एठा, एठा पुरवा, एठा गांव, वीरगंज, नई बस्ती, पंडित पुरवा, पटना, तहसील, ब्लॉक, थाना, सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र के आसपास के 20 हजार परिवारों को लाभ दिया जाना था। अब ग्रामीणों व अधिकारियों के दबाव के चलते वाटर हैड टैंक में आधा पानी भर कर आपूर्ति दी जा रही है। इससे कम प्रेशर के कारण पानी अपने अंतिम मंजिल तक नहीं पहुंच पाता।
टंकी बनी पर कई मजरों में नहीं डाली पाइप
पारसा डेहरिया में पेयजल पाइप लाइन योजना के तहत बनाए गए वाटर हैड टैंक का कार्य वर्ष 2014-15 में पूरा हो गया था, लेकिन नव्वापुरवा सहित कई मजरों में आज भी पाइप लाइन बिछाने का कार्य अधूरा पड़ा है। कई मजरों में जहां पाइप बिछ गई है, वहां जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे लोगों को इस परियोजना का लाभ नहीं मिल रहा है। इसके चलते ग्रामीणों में आक्रोश है।
पाइप फटने से जगह जगह हो रहा जलभराव
अमवा में पेयजल पाइप लाइन योजना पर दो करोड़ 81 लाख रुपये खर्च किए गए थे। इस परियोजना के तहत 17.27 किलोमीटर क्षेत्र में लोगों तक पानी पहुंचाया जाना था, लेकिन यहां ट्रायल में ही जमीन पर पड़ी पाइप फट गई। इसके चलते अमवा मूल गांव को छोड़ कर शेष स्थानों पर पानी की आपूर्ति नहीं हो सकी। यही नहीं पाइप फटा होने के कारण जगह जगह जलभराव हो रहा है। यह योजना भी आम लोगों का हित नहीं कर पाई।
परियोजना 2012 में पूरी पर नहीं हुई जलापूर्ति
गिलौला में पेयजल पाइप लाइन योजना वर्ष 2012 में पूरी हुई थी। इस योजना के तहत गिलौला बाजार, कस्बा, थाना, ब्लॉक, अस्पताल सहित अन्य सरकारी कार्यालयों व आवासीय क्षेत्रों में पानी दिया जाना था, लेकिन यहां भी पाइप लाइन ट्रायल के दिन ही फट गई थी। तभी से यह योजना ठप पड़ी है। इसके चलते लाखों रुपये खर्च होने के बाद भी लोगों को इसका लाभ नहीं मिल सका।
शासन को भेजी रिपोर्ट
जिले की सभी पेयजल योजनाओं की जांच की गई है। जो जिस स्थिति में है, उसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन स्तर पर ही जवाबदेही तय की जाएगी। योजनाएं सुचारु रूप से संचालित हो उसकी व्यवस्था की जानी है। - अवनीश राय, सीडीओ
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