श्रावस्ती/इकौना/गिलौला। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में हुए सड़क हादसों में चार लोगों की मौत हो गई। 19 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को सीएचसी व जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों के घरों में होली की खुशियां मातम में बदल गईं।
गिलौला क्षेत्र की ग्राम पंचायत कमला भारी निवासी सुभाष (20) अपनी मां की मौत के बाद बचपन से खरगौरा बस्ती के मजरा लहेरीपुरवा निवासी मामा विजय वर्मा के घर रहते थे। बुधवार सुबह वह बाइक में तेल डलवाने पेट्रोल पंप जा रहे थे। बौद्ध परिपथ पर खरगौरा बस्ती पेट्रोल पंप के पास बलरामपुर की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने उन्हें टक्कर मार दी।
हादसे के बाद ट्रक चालक भाग गया। घायल सुभाष को पंप कर्मियों ने सीएचसी इकौना पहुंचाया। प्राथमिक इलाज के बाद उन्हें जिला अस्पताल भिनगा रेफर कर दिया गया। वहां भी स्थिति में सुधार न होने पर चिकित्सकों ने मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
उधर, भिनगा के गौड़रा निवासी संतराम (50) बुधवार रात बाइक से अपनी ससुराल सोनवा के लोहरासपुर निरहा जा रहे थे। भिनगा-बहराइच फोरलेन पर बैधी के पास उन्हें अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। गंभीर हालत में उन्हें एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिनगा ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई।
इकौना की भगवानपुर बनकट ग्राम पंचायत के मजरा डिहवा निवासी जटाशंकर गोस्वामी (35) मंगलवार को किसी काम से गिलौला गए थे। वहां से घर लौटते समय बौद्ध परिपथ पर मलावां गांव के पास उनकी बाइक में अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। एंबुलेंस से उन्हें सीएचसी गिलौला ले जाया गया, जहां से मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया गया। वहां इलाज के दौरान जटाशंकर की मौत हो गई।
गिलौला क्षेत्र के ग्राम भिखारीपुर मसढ़ी निवासी कुन्ने (30) दो मार्च को जम्मू कश्मीर से वह घर आ रहे थे। बहराइच के योगेंद्रधाम रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद वह भतीजे ओम (20) के साथ बाइक से घर जा रहे थे। बाइक पर कुन्ने व ओम के साथ-साथ गांव निवासी खुड़भुड़ (32) भी सवार थे।
गिलौला-खुटेहना मार्ग पर गोबार गांव के पास उनकी बाइक में अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी। हादसे में तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए। आरोप है कि लगभग एक घंटे तक एंबुलेंस नहीं आई। एक घंटे बाद एंबुलेंस आने पर तीनों को गिलौला सीएचसी पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने कुन्ने को मृत घोषित कर दिया। ओम व खुड़भुड़ को मेडिकल कॉलेज बहराइच रेफर कर दिया गया। कुन्ने जम्मू कश्मीर में रहकर मजदूरी करते थे।