कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए 42 सदस्यीय दल ने भिक्षु भवरानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर प्रार्थना की। इसके बाद बौद्ध सभा का आयोजन किया गया।
भिक्षु भंवरानंद ने कहा कि बौद्ध धर्म में वर्षावास का विशेष महत्व है। वर्षावास काल व्यतीत करने वाले भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर ध्यान-साधना और पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान भिक्षु विचरण नहीं करते। भिक्षु को एक स्थान पर रहकर बुद्ध के करुणा, शील और त्याग के सिद्धांतों का पूर्णरूपेण पालन करना होता है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने आप को फलहीन विवादों में शामिल नहीं किया। व्यक्ति को इच्छाओं पर विजय प्राप्त करने से निर्वाण प्राप्त होता है, अर्थात मनुष्य जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।
गौतम बुद्ध ने मानव दुखों के खात्मे के लिए आठ गुना पथ (अष्टांगिका मार्ग) की सिफारिश की। इसमें सही अवलोकन, सही निर्धारण, सही भाषण, सही कार्य, सही आजीविका, सही प्रयास, सही जागरूकता और सही चिंता शामिल थी।
यदि कोई व्यक्ति इस आठ पथ का अनुसरण करता है, तो वह खुद को पुजारियों की यंत्रणा से मुक्त करेगा और अपने गंतव्य तक पहुंचेगा। व्यक्ति को विलास और तपस्या, दोनों से बचना चाहिए और बीच का रास्ता निर्धारित करना चाहिए। इसके बाद अनुयायियों ने जेतवन परिसर, गंध कुटी, आनंद बोधि, अंगुलीमाल गुफा का भ्रमण किया।