जेतवन परिसर का भ्रमण करते अनुयायी।- संवाद
कटरा। श्रीलंका के 20, म्यांमार के 40, थाईलैंड के 20 व महाराष्ट्र के 40 अनुयायियों का दल शनिवार को दर्शन-पूजन के लिए बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती पहुंचा। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में गंध कुटी पर पारंपरिक तरीके से फूल पूजा की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा के दौरान भिक्षु दीपालोक ने बताया कि बुद्ध राजगृह के बाहर वेलुवन (बांस के उपवन) में सैकड़ों भिक्षुओं के साथ निवास कर रहे थे। तब वहां के राजा बिंबिसार थे, जो बुद्ध के महान भक्तों में से एक थे। उन्होंने अपने अनेक प्रजाजनों को भी अपनी शिक्षाओं के अभ्यास के लिए प्रेरित किया।
बिंबिसार के समय बुद्ध की शिक्षाओं का तेजी से प्रसार हुआ, लेकिन उनका छोटा भाई बुद्ध शिक्षाओं में विश्वास नहीं करता था। बिंबिसार के समझाने व बुद्ध के ओज के चलते कुछ दिन बाद उनके छोटे भाई ने भी बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाया।
सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।