तपोस्थली स्थित बौद्ध विहार में प्रार्थना करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को उत्तराखंड से आए अनुयायियों से गुलजार रही। दल ने आनंद बोधि पर भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में प्रार्थना की।
भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाओं का सार है शील, समाधि और प्रज्ञा। सर्व पाप से विरत ही ‘शील’ है। इष्ट अनिष्ट से परे संभाव में रति ‘प्रज्ञा’ है। भगवान बुद्ध प्रज्ञा व करुणा की साक्षात मूर्ति थे। यह दोनों ही गुण उनमें उत्कर्ष की पराकाष्ठा प्राप्त कर समरस होकर समाहित हो गए थे। बुद्ध के अनुसार धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में सभी स्त्री एवं पुरुषों में समान योग्यता एवं अधिकार हैं। इतना ही नहीं, शिक्षा, चिकित्सा और आजीविका के क्षेत्र में भी वह समानता के पक्षधर थे। उनके अनुसार एक का दूसरे मानव के साथ व्यवहार मानवता के आधार पर होना चाहिए न कि जाति, वर्ण और लिंग आदि के आधार पर। इस मौके पर काफी अनुयायी मौजूद रहे।