गंध कुटी में फूल पूजा करते अनुयायी।
- फोटो : गंध कुटी में फूल पूजा करते अनुयायी।
कटरा (श्रावस्ती)। श्रीलंका से आए 216 अनुयायियों के दल ने मंगलवार को पारंपरिक अंदाज में गंधकुटी पर पूजा-अर्चना की। साथ ही तपोस्थली के अन्य स्थलों का भ्रमण कर इतिहास को खंगाला। इस दौरान बौद्ध भिक्षुणी माता सुमेधा थेरो की अध्यक्षता में बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा में माता सुमेधा ने कहा कि बौद्ध दर्शन के दो प्रमुख सिद्धांत हैं। वास्तव में ज्ञान इस संसार से परे किसी शक्ति को जानना नही, बल्कि संसार में होने वाले दुख का निवारण करने के उपाय ढूंढ कर उन पर आचरण करना है। आध्यात्म मनुष्य का दुख दूर नही करता। संसार में हर वस्तु और अवस्था परिवर्तनशील है, इसलिए दुख की अवस्था भी जीवन में अवश्य आएगी। मध्यम या माध्यमिक मार्ग ही बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा है। माध्यमिक मार्ग से अभिप्राय है कि किसी भी वस्तु, गुण अथवा प्रवृति का न तो आधिक्य हो और न ही कमी हो। सब कुछ संतुलित अनुपात में होना चाहिए।