बुद्ध की तपोस्थली स्थित गंधकुटी में प्रार्थना करता म्यांमार से आया दल।
कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही। म्यांमार से आए अनुयायियों ने भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में गंधकुटी पर प्रार्थना की। इसके बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण भी किया।
भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध ने बुद्धत्व की प्राप्ति के बाद पहला प्रवचन सारनाथ के मृगदाव में दिया था। यह उपदेश धर्मचक्र परिवर्तन कहलाया। यह बौद्ध मत की शिक्षाओं का मूल बिंदु है। बुद्ध के उपदेशों व बौद्ध धर्म के विचारों को त्रिपिटक में समाहित किया गया है।
सुत पिटक में बुद्ध के धार्मिक विचारों व वचनों का संग्रह किया गया है। विनय पिटक में बौद्ध संघ के नियम लिखे गए, अभिधम्म पिटक में बौद्ध दर्शन की विवेचना की गई है। प्रतीत्यसमुत्पाद के सिद्धांत को बुद्ध ने शिक्षा का सार कहा। इसका भी बौद्ध धर्मावलंबियों में महत्वपूर्ण स्थान है। पूजा के बाद दल के सदस्यों ने तपोस्थली का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी ली।