कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती इस समय अनुयायियों से गुलजार है। विभिन्न देशों से आने वाले बौद्ध उपासकों की ओर से तपोस्थली में विशेष वर्षावास पूजा की जा रही है। इसी के क्रम में गुरुवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों ने पूजन किया। इससे तपोस्थली बुद्धम् शरणम् गच्छामि के उद्घोष से गुंजायमान रही।
श्रीलंका से बौद्ध अनुयायियों का एक दल गुरुवार को श्रावस्ती पहुंचा। दल में शामिल सदस्यों ने जेतवन में श्रीलंकाई रीति रिवाज से भगवान बुद्ध की पूजा की। इसके बाद अनुयायियों ने आनंद बोधि पर भगवान बुद्ध की प्रतिमा रखकर विशेष वर्षावास पूजन किया।
श्रीलंका मंदिर के बौद्ध भिक्षु दीपालोक महाथेरो के नेतृत्व में आयोजित इस पूजन में उन्होंने बताया कि एक बार गौतम बुद्ध का प्रवचन चल रहा था। एक व्यक्ति हर रोज प्रवचन सुनने आता था। बुद्ध अपने प्रवचन में लोभ, मोह, अहंकार, द्वेष आदि छोड़ने की बात किया करते थे।
एक दिन वह व्यक्ति गौतम बुद्ध के पास आकर बोला, ‘बुद्ध जी, मैं एक महीने से आपका प्रवचन रोज सुन रहा हूं। फिर भी मुझ पर उसका कोई असर नहीं हो रहा है। तब भगवान बुद्ध ने उससे पूछा तुम कहां रहते हो। उसने उत्तर दिया कि वह श्रावस्ती निवासी है।
इसके बाद भगवान बुद्ध ने उसे सद्मार्ग दिखाया। पूजन के उपरांत अनुयायियों ने तपोस्थली स्थित कौशांबी कुटी, शिवली स्तूप, सभामंडप, सूर्य कुंड, आनंद भवन, राहुल कुटी, अंगुलिमाल स्तूप आदि स्थलों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
इस दौरान अनुयायियों की ओर से बुद्धम् शरणम् गच्छामि संघम् शरणम् गच्छामि, धम्मम् शरणम् गच्छामि का उद्घोष किया गया। इस मौके पर आनंद सागर, धम्म सागर, माता विद्यावती सहित काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।