श्रावस्ती। तराई में ठंड का सितम जारी है। घने कोहरे व बर्फीली हवा के चलते बढ़ी गलन से लोग बेहाल हैं। रविवार को जिले का तापमान 4.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। ठंड के चलते ज्यादातर लोग घरों में ही दुबके रहे। वहीं ठंड से ठिठुर रहे तराई वासियों को राहत दिलाने में प्रशासन रुचि नहीं ले रहा है। चौक चौराहों पर गरीबों, बेसहारा व मजदूरी पेशा लोगों को ठंड से बचाने के लिए अलाव की व्यवस्था नहीं कराई गई है। उधर गरीबों की मदद के लिए अब तक न जन प्रतिनिधि और न ही स्वयं सेवी संगठन ही आगे आए हैं।
तराई में गरीबों पर अब पूस की रात भारी पड़ने लगी है। शनिवार की शाम से शुरू हुआ घना कोहरा रविवार को पूरे दिन छाया रहा। इसके साथ ही पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी व लगातार चल रही सर्द हवाओं ने ठिठुरन काफी बढ़ा दी है। तेज पश्चिमोत्तर हवा के चलते समूची तराई में लोग कड़ाके की ठंड व गलन से बेहाल रहे।
रविवार को मौसम का पारा लुढ़क कर 4.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। ऐसे में न सिर्फ इंसान ही बल्कि पशु पक्षी भी ठंड से बचने का प्रयास करते दिखे। शीतलहर ने लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया है। रविवार को अवकाश होने के कारण जहां मुख्य मार्ग पर सन्नाटा पसरा रहा। वहीं व्यस्त रहने वाली बाजारों में भी चहल पहल कम रही। उधर कड़ाके की ठंड के बावजूद जिला प्रशासन सहित जन प्रतिनिधि व स्वयं सेवी संगठन अब तक गरीबों की मदद के लिए आगे नहीं आए है।
कहीं जलाया कूड़ा तो कहीं लोग खुद कर रहे इंतजाम
जिले में पड़ रही ठंड ने लोगों को घरों में दुबकने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे में निजी आवश्यकता व मेहनत मजदूरी के लिए बाजार आने वाले लोगों को ठंड से कांपते देखा जा रहा है। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में भी प्रशासन की ओर से नगर के चौक चौराहों व बाजारों में अलाव की व्यवस्था नहीं कराई गई। इतना ही नहीं अस्पताल, बस अड्डा व सार्वजनिक स्थलों पर अलाव नहीं जलने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में ठंड से राहत के लिए बेहाल लोगों की ओर से मार्ग किनारे पड़े कूड़े को एकत्र कर जलाया जा रहा है। कुछ स्थानों पर लोग खुद ही लकड़ी खरीद कर ठंड से बचने के लिए अलाव जला रहे हैं।
लुढ़का पारा तो चढ़ा बाजार, बढ़ी गर्म कपड़ों की मांग
पूस मास का प्रथम पखवारा बीतने को है। तराई में ठंड का सितम पूरी तरह जारी है। अचानक बढ़ी ठंड ने जहां मौसम के पारे को लुढ़का दिया है, वहीं ऊनी कपड़ों का बाजार गर्म हो गया है। लोग ठंड से निजात के लिए ऊनी कपड़े, जाकेट, स्वेटर, टोपी कंबल शाल आदि की खरीदारी करने लगे हैं। भिनगा नगर के थोक कपड़ा व्यवसायी मुन्ना व चुन्ना बताते हैं कि विगत तीन दिनों से ऊनी कपड़ों की मांग कई गुना बढ़ गई है। वहीं ठेले पर टोपी, मफलर, मोजा बेचने वाले संजय बताते हैं कि कुछ दिनों में ठंड बढ़ गई है। इससे खरीदारों की संख्या भी बढ़ी है।
लकड़ी और कोयले की बढ़ी मांग
तराई में ठंड से बचने के लिए लोगों को आंच का ही सहारा है। ऐसे में लोग लकड़ी व कोयले की खरीदारी में भी जुट गए हैं। लकड़ियों की बढ़ी मांग को देखते हुए जंगल में अवैध कटान भी तेज हो गई है। दिन में एक बार साइकिल से लाकर जलौनी बेचने वाले लकड़हारे अब दो से तीन बार लकड़ी लाकर बेच रहे हैं। वहीं वह सामान्य दिनों की अपेक्षा दोगुना पैसा भी वसूल रहे हैं। उधर भिनगा के कुछ मोहल्लों में चोरी छिपे कोयला बना कर बेचने वालों ने भी कोयले का दाम बढ़ा दिया है।
सावधानी बरतें किसान
जिले में इस समय काफी ठंड पड़ रही है। ऐसे में खेतों में लगी सरसों व अरहर की फसल को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को चाहिए कि वह संभव हो तो खेत के किनारे धुआं करें। गेहूं व मसूर की बोआई करने वाले किसानों को मौसम का फायदा मिलेगा। - आरपी राना, जिला कृषि अधिकारी
ठंड से बचने का करें प्रयास
जिले में मौसम काफी ठंडा हो चुका है। ऐसे में बच्चों व बुजुर्गों को ठंड से बचाने का प्रयास करें। जहां तक संभव हो गुनगुने पानी का सेवन करें। कान ढक कर रखें। घर से बाहर निकलते समय शरीर को पूरी तरह से ढक कर निकले। वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर लगाएं। वाहन को धीमी गति में चलाएं। इसके बावजूद यदि ठंड लगने का अहसास हो तो तत्काल चिकित्सक की राय लें। - डा. श्याम मिश्रा, वरिष्ठ चिकित्सक संयुक्त जिला चिकित्सालय
पशुओं को दें गुनगुना पानी
ठंड से पशुओं को बचाने के लिए उनको ऐसी जगह रखें जहां हवा का प्रवेश न हो। खिड़की व दरवाजे पर जूट का बोरा लटका दें। मवेशियों को दो से तीन बार गुनगुना पानी पिलाएं। साथ ही उसमें गुड़ अथवा खड़िया मिट्टी मिला दें। खाने में हरे चारे का प्रयोग करें। मवेशियों को रखने के स्थान पर धुआं कदापि न करें। - डॉ. अनिल शर्मा, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी