श्रावस्ती। होली करीब आते ही ग्रामीण क्षेत्रों में फगुआरों की मंडली सजने लगती है। रात में लोग फगुआ गाते हैं। यह क्रम होली तक लगातार चलता है, लेकिन कुछ वर्षों से डीजे का चलन बढ़ने से फगुआरों की मंडली भी बिखर गई है। ऐसे में धीरे-धीरे लोक परंपराएं लुप्त होती जा रही हैं।
होली के पखवाड़े भर पहले से ही गांवों में रंगोत्सव का उल्लास दिखने लगता है। दिन भर खेत में काम करने के बाद रात में फगुआ व चौताल सुनकर लोगों की थकान उतर जाती है। हालांकि अब यह परंपरा कम ही देखने को मिलती है।
बावजूद इसके कुछ स्थानों पर अभी भी फगुआरों की मंडली सजती है। महिलाएं भी होलिका दहन स्थल पर पहुंच कर पहले होलिका पर रंग का छिड़काव करती हैं, उसके बाद उनकी रंगों की होली प्रारंभ होती है।
होली फगुआरों की जुबानी
ग्राम शिवगढ़ कला निवासी बुधई वर्मा बताते हैं कि करीब आठ वर्ष पूर्व जब डीजे प्रचलन में नहीं था, तो गांव के श्रीराम जानकी मंदिर में रात में फगुआ गाने और सुनने के लिए दूसरे गांवों से भी लोग आते थे। भंगहा निवासी सित्तू बताते हैं कि होली के दिन मंडली होलिका स्थल से फगुआ गाने की शुरुआत करती थी। इसके बाद घर-घर जाकर आशीर्वादी गीत- सदा अनंद रहै यह द्वारा रघुबर खेलैं होली हो... गाते थे, लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा खत्म होती जा रही है। तुलसीपुर निवासी बड़ेलाल सोनकर बताते हैं कि फगुआरे जब किसी के दरवाजे पर पहुंचते हैं तो लोग अबीर-गुलाल लगाने के साथ ही मिष्ठान खिलाकर उनका स्वागत करते हैं।
संवेदनशील स्थलों पर तैनात रहेगी पीएसी
एएसपी मुकेश चंद्र उत्तम ने बताया कि होली को लेकर पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड में है। भारत-नेपाल सीमा पर भी कड़ी सतर्कता बरती जा रही है। साथ ही जिले में संवेदनशील स्थलों की सूची तैयार की जा रही है। होली में इन स्थलों पर पीएसी व स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम तैनात की जाएगी। साथ ही धार्मिक स्थलों व अन्य स्थानों पर भी पुलिस को तैनात किया जा रहा है। शांति व्यवस्था में बाधा पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।