कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को बर्मा से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक ढंग से गंधकुटी पर पूजन-अर्चन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवानंद ने कहा कि ध्यान मन को शांत बनाने का समाधान है, जो लालसा और घृणा से ऊपर है। किसी झील की सतह पर लहरें हों, तो हम उसकी गहराई नहीं देख सकते। इसी तरह मन अशांत होने पर हम अपने भीतर सामंजस्य और एकता का अनुभव नहीं कर सकते हैं।
ध्यान हमारे मन को शांत करता है और हमें अधिक तेज, खुशहाल व अंतर्ज्ञानी बनाता है। हम सभी अंतर्ज्ञानी बनने और सही विचारों के सही समय पर आने की उम्मीद करते हैं, लेकिन ऐसा तभी होगा, जब मन वासना, लोभ, स्वामित्व और अहंकार से मुक्त होगा।
भिक्षु देवानंद ने आगे कहा कि जब मन उस शुद्ध रूप में होता है, जिसके साथ हम पैदा हुए हैं, तो प्रकृति आपकी सुनती है और आपको मानसिक स्पष्टता मिलती है। सभा के बाद अनुयायियों ने कच्ची कुटी-पक्की कुटी, संघाराम बुद्ध विहार, गंध कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, कौशाम कुटी, शिवली स्तूप, राहुल कुटी, संघमित्रा कुटी, आनंद कुटी, ओड़ाझार टीला आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास की जानकारी ली।